अंग-अंग प्रेम रंग। साँवरा बना विहंग।। राधिका उदास जान। छेड़ मंद-मंद तान।। सौम्य गीत प्रेम गान। कुंज ढूँढता निदान।। ध्यान में धरे अनंग। अंग-अंग प्रेम रंग।।०१।। श्याम बोलते निहार। राधिका…
Author: madhukumari
गीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झा
श्रीकृष्ण कहते, तुझमें शक्ति है, तू परंतप, महाबाहो, महावीर है, तू पार्थ, ईश्वर का पवित्र अंश, गुडाकेश, साहसी, परम धीर है, कर्तापन का अभिमान छोड़, मेरे कार्यों में निमित्तमात्र बनता…
जीत का उत्सव-राम किशोर पाठक
जहाँ जीत है मिलता हमको, उत्सव में हम-सब खोते। कभी हार जब गले लगाती, नजर झुकाए हम रोते।। हार-जीत दोनों ही हमको, सीख सदा सबको देती। जीवन का बन अंग…
नींद से अब जागिए-राम किशोर पाठक
नींद से जग जाइए। गीत प्रभु का गाइए।। भूल कड़वी बात को। प्रेम से मुस्काइए।। दोष जिसका भी रहा। रोष मत दिखलाइए।। ध्यान रख मन सत्य का। जोश में मत…
कुछ तो सोच समझ ले प्राणी – राम किशोर पाठक
कुछ तो सोच समझ ले प्राणी। निकले जब भी मुख से वाणी।। निज पर इतना अभिमान न कर। अपना इतना गुणगान न कर।। पूर्ण धरा पर कौन यहाँ है। भ्रम…
होली-कहमुकरी- राम किशोर पाठक
उसके आते नर्तन करती। मन में नव भावों को गढ़ती।। बहकाए वह मेरी बोली। क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०१।। आते ही उल्लास जगाए। उपवन सरिस बदन महकाए।। करके हर-पल…
महिला सशक्तिकरण-राम किशोर पाठक
नारी के सम्मान की, आज लगी है होड़। पुरुष बिचारा कर रहा, घर-बाहर कर-जोड़।। घर-बाहर कर-जोड़, करे दिल को समझाए। आधा निज का अंग, उसे सामर्थ्य दिखाए।। खुशी आज चहुँओर,…
रसधार है नारी-अर्जुन प्रभात
प्रकृति की कल्पना कोमल, मधुर रस धार है नारी। नहीं नर से कहीं कम ,सृष्टि का श्रृंगार है नारी ।। ये नारी स्नेह की प्रतिमा …
नारी- राम किशोर पाठक
नारी का सम्मान, हमें संस्कृति सिखलाती। जीवन की हर राह, हमें नारी ही दिखलाती।। देती जब यह जन्म, दुग्ध से पालन करती। हर-पल भरती नेह, अंक में लालन करती।। ममता…
श्याम नारी वेश में-राम किशोर पाठक
श्याम नारी वेश में। पुष्प डाले केश में।। माथ पर डलिया लिए। कान की बलिया लिए।। हार कंगण संग में। चूड़ियाँ नवरंग में।। नारियों के देश में । श्याम नारी…