Author: madhukumari

Ram Kishore Pathak

अहिल्याबाई होल्कर-राम किशोर पाठकअहिल्याबाई होल्कर-राम किशोर पाठक

0 Comments 7:26 pm

वीरों की गाथाओं में है, एक पुराना नाम। वीरांगना अहिल्याबाई, को हम करें प्रणाम।। महाराष्ट्र साम्राज्य मराठा, चौंड़ी नामक गाँव।[...]

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Ram Kishore Pathak

कृपा करो प्रदान माँ-राम किशोर पाठककृपा करो प्रदान माँ-राम किशोर पाठक

0 Comments 7:22 pm

कृपा करो प्रदान माँ। मिले नया विहान माँ।। निदान भूल का करो। विकार शूल को हरो।। विचार शुद्धता भरो। प्रगाढ़[...]

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Ram Kishore Pathak

अंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठकअंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठक

0 Comments 7:18 pm

अंग-अंग प्रेम रंग। साँवरा बना विहंग।। राधिका उदास जान। छेड़ मंद-मंद तान।। सौम्य गीत प्रेम गान। कुंज ढूँढता निदान।। ध्यान[...]

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Girindra Mohan Jha

गीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झागीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 7:14 pm

श्रीकृष्ण कहते, तुझमें शक्ति है, तू परंतप, महाबाहो, महावीर है, तू पार्थ, ईश्वर का पवित्र अंश, गुडाकेश, साहसी, परम धीर[...]

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Ram Kishore Pathak

जीत का उत्सव-राम किशोर पाठकजीत का उत्सव-राम किशोर पाठक

0 Comments 8:33 pm

जहाँ जीत है मिलता हमको, उत्सव में हम-सब खोते। कभी हार जब गले लगाती, नजर झुकाए हम रोते।। हार-जीत दोनों[...]

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Ram Kishore Pathak

नींद से अब जागिए-राम किशोर पाठकनींद से अब जागिए-राम किशोर पाठक

0 Comments 8:26 pm

नींद से जग जाइए। गीत प्रभु का गाइए।। भूल कड़वी बात को। प्रेम से मुस्काइए।। दोष जिसका भी रहा। रोष[...]

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Ram Kishore Pathak

कुछ तो सोच समझ ले प्राणी – राम किशोर पाठककुछ तो सोच समझ ले प्राणी – राम किशोर पाठक

0 Comments 8:22 pm

कुछ तो सोच समझ ले प्राणी। निकले जब भी मुख से वाणी।। निज पर इतना अभिमान न कर। अपना इतना[...]

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Ram Kishore Pathak

होली-कहमुकरी- राम किशोर पाठकहोली-कहमुकरी- राम किशोर पाठक

0 Comments 2:38 pm

उसके आते नर्तन करती। मन में नव भावों को गढ़ती।। बहकाए वह मेरी बोली। क्या सखि? साजन! न सखी! होली।।०१।।[...]

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Ram Kishore Pathak

महिला सशक्तिकरण-राम किशोर पाठकमहिला सशक्तिकरण-राम किशोर पाठक

0 Comments 2:32 pm

नारी के सम्मान की, आज लगी है होड़। पुरुष बिचारा कर रहा, घर-बाहर कर-जोड़।। घर-बाहर कर-जोड़, करे दिल को समझाए।[...]

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रसधार है नारी-अर्जुन प्रभातरसधार है नारी-अर्जुन प्रभात

0 Comments 10:33 pm

प्रकृति की कल्पना कोमल, मधुर रस धार है नारी। नहीं नर से कहीं कम ,सृष्टि का श्रृंगार है नारी ।।[...]

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