विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस -गिरिंद्र मोहन झा

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस- 10 अक्तूबर मन तू अपने मन को एकाग्र कर, उत्साही, ऊर्जावान कर, उत्तम विचारों, शुभ संकल्पों से तू अपने मन को भर, मन को निर्भीक, सतर्क…

करवा चौथ रामपाल प्रसाद सिंह

करवा चौथ गीतिका छंद दो हृदय सद्भावना के,मिल रहें विश्वास में। चंद्रमा आशीष भरने,आ रहा आकाश में।। चौथ करवा दिन सुहाना,दे रहा खुशियाॅं सभी खास नारी भक्ति करके,पा गई खुशियाॅं…

कैकेई का त्याग- विधाता छंद गीत -रामकिशोर पाठक

कैकेई का त्याग- विधाता छंद गीत जगत कल्याण के कारण, किया विष पान त्रिपुरारी। पुनः दुनिया बचाने को, किया है त्याग हित नारी।। निभायी राष्ट्र से नाता, लुटायी स्वप्न थी…

वृद्धावस्था-गिरींद्र मोहन झा

वृद्धावस्था (कविता: गिरीन्द्र मोहन झा) शैशव, बाल्य, किशोर, युवा, से होकर तुम बने हो वृद्ध, तुम्हारा असली,बड़ा गुण है, हर स्थिति में स्थिर औ’ सिद्ध, ज्ञान, विज्ञान, अनुभव में गम्भीर,…

शरद पुर्णिमा- राम किशोर पाठक

शरद पूर्णिमा- महामंगला छंद गीत स्वागत करती किरण, सोम देव मुस्कात। सुरभित शीतल शरद, मनभावन यह रात।। रजनी व्याकुल अजब, लगती अतिशय शांत। श्वेत रंग की वसन, व्योम दिखे कुछ…

शरद ऋतु का दस्तक -जैनेंद्र प्रसाद रवि

शरद् ऋतु का दस्तक अंधकार छंटते हीं, रवि की सवारी आया, बैठ तरु डाल पर, करते परिंदे शोर। पछियाँ जो समूह में, कोलाहल कर रहे, अचानक झुंड बना, उड़ते गगन…