एक सांस में जलता जीवन (नशा मुक्ति पर कविता) नशा नहीं है किसी समाधान, ये लाता केवल दुख का जहान। गांजा, सिगरेट, स्मैक, सुलेशन, युवा में बढ़ता सूखे नशे का…
Author: Dr Snehlata Dwivedi
भाई दूज -राम किशोर पाठक
भाई-दूज – गीत भाई-दूज हुआ फलदायी, फलित सदा अच्छाई से। अद्भुत हमने देखा जग में, प्यार बहन का भाई से।। कहते यम की किसे द्वितीया, आओ हम इसको जाने। कार्तिक…
लक्ष्य -बैकुंठ बिहारी
लक्ष्य जीवन का प्रथम उद्देश्य है लक्ष्य, सफलता की प्रेरणा है लक्ष्य, कर्तव्य की प्रेरणा है लक्ष्य, आत्म सम्मान की प्रेरणा है लक्ष्य, कृतज्ञता की प्रेरणा है लक्ष्य, स्वार्थ की…
स्वयं की खोज-अवधेश कुमार
स्वयं की खोज : – भीड़ में गुम है कोई पहचान , हर चेहरा / मुखौटा जैसे एक समान। धन की दौड़ हो या सुख की चाह, मन में दर्द…
बनकर कान्हा गिरधारी-रामकिशोर पाठक
बनकर कान्हा गिरधारी – गीत लीलाधर ने भू पर आकर, लीला की अद्भुत न्यारी। शोक मिटाए ब्रज वनिता की, बनकर कान्हा गिरधारी। पूजन रोका जब सुरपति का, इंद्र कोप थे…
गोवर्धन धारी -रामकिशोर पाठक
गोवर्धन धारी – गीतिका गोवर्धन की पूजा करने, निकले हैं सब नर नारी। करके मर्दन मान इंद्र का, झूम रहे गिरिवर धारी।। गोकुल वासी पूजन करते, सुरपति खुश हो जाते…
स्वास्थ्य बैकुंठ बिहारी
स्वास्थ्य स्वास्थ्य का ध्यान रखिए, यह प्रकृति की अनुपम भेट है। उत्तम स्वास्थ्य ऊर्जा प्रदान करता है, अंग प्रत्यंग को स्फूर्तिमान करता है, आशाओं की नई किरण जगाता है, अनायास…
ओ भैया आयल रे भैया-अवधेश कुमार
ओ भैया आयल रे भैया दीपक रौशनी झल‑झल हे, नीप कै झलकै घर‑आँगन रे। बहिन अरिपन बनबै ये पीढ़ी पर , थार सजा आरती फूलक तिलक रे। ओ भैया आयल…
ढूंढता हूं अवनीश कुमार
“ढूंढ़ता हूं” मैं माँ की सुनी माँग में उस दमकती सुंदर आभा — ‘सिंदूर’ की वह पावन आभा ढूंढ़ता हूं, जिसमें बसती थीं उसके जीवन की उजली सुबहें, जिससे उसके…
कचरे की ढेर जैनेंद्र प्रसाद
कचरे की ढेर समसामयिक रचना सबको दे खुशहाली, चली गई ये दिवाली, बाजारों में जमा हुई, कचरे की ढेर है। जश्न पुरज़ोर होता, पटाखे की शोर होता, जागने से आंखें…