छंद -रामपाल प्रसाद

शीतलता के बीच बहाती,रहती तू रस-धार है! नीले-नीले नभ-मंदिर से,हे माते!हो जा प्रकट, उत्कट प्रत्याशा में ॲंखियाॅं,राह तकी है एकटक। देर हुई माॅं ब्रह्मचारिणी!,क्षमा करो नादान को, जो भी संभव…

जैनेंद्र प्रसाद -महिमा अपार

महिमा अपार है मंदिरों में भीड़ भारी,दरस को नर-नारी, श्रद्धालुओं से है पटा, मांँ का दरबार है। दीप-धूप जले ज्योति, आरती मंगल होती, दर्शन को लगी हुई, भक्तों की क़तार…

महादेवी स्त्रोत – राम किशोर पाठक

महादेवी स्त्रोत नमो दिव्यै निराकारा । महा दिव्यै शिवाकारा।। त्वमेका दृष्टि पथ गामी त्वमेका सृष्टि अविरामी त्वयि सीता च सावित्री त्वयि गीता च गायत्री त्वमेका ही सुधा धारा। महा दिव्यै…

डॉ पूनम कुमारी- ब्रह्मचारिणी मां

माता का दूसरा दिन ब्रह्मचारिणी माता तेरे चरणों की धूल, मेरे आंचल में खिल जाएं फ़ूल तुम बिन ना कोई मेरा सहारा, तू ही है मेरी जीवन धारा, तेरी भक्ति…

ब्रह्मचारिणी मां -डॉ स्नेहलता द्विवेदी

ब्रह्मचारिणी माँ नमः शिवा ज्ञान ध्यान की प्रभा, तपस्विनी महातपा। जपे तू कोटि मन्त्र जा, नमः शिवा नमः शिवा। सहस्त्र वर्ष तप करा, शतः शतः तू व्रत धरा, संकल्प तो…

हे शैलसुता -डॉ स्नेहलता द्विवेदी

हे शैलसुता! हे पर्वतराज हिमाद्रि जना, हे भवभय तारिणी बृषवाहना। हे कल्याणी सती सत्य शिवा , प्रणमामि त्वयं हे शैलसुता। हे श्वेताम्बरा हे प्रेम सुधा, हे तप जप ज्ञान की…

है मान बाकी राम किशोर पाठक

है मान बाकी – शिखंडिनी छंद किसे हम कहें, बातें पुरानी। रहा कुछ नहीं, बाकी कहानी।। जिन्हें सुबह से, ढूँढा जमाना। बना अब रहे, ढेरों बहाना।। नहीं समझते जो मौन…