पिय मन भायो मैं तो सखी बस प्रेम पुजारन, पिय के हिय में रहूँ सिया बन। मैं भोली हूँ प्यार में जोगन, बनी रहूँ मैं पिय की दुल्हन। कार्तिक मास…
Author: Dr Snehlata Dwivedi
कैकेई का त्याग- विधाता छंद गीत -रामकिशोर पाठक
कैकेई का त्याग- विधाता छंद गीत जगत कल्याण के कारण, किया विष पान त्रिपुरारी। पुनः दुनिया बचाने को, किया है त्याग हित नारी।। निभायी राष्ट्र से नाता, लुटायी स्वप्न थी…
करवा चौथ -नीतू रानी
करवाचौथ चलनी चमकदार हे। हे बहिना पिया करै छी करवाचौथ त्योहार हे, भैर दिन राएख केअ उपवास हे ना। पिया संग गेलौं हम बाजार किनलौ साड़ी चूड़ी लाल, हे बहिना…
वृद्धावस्था-गिरींद्र मोहन झा
वृद्धावस्था (कविता: गिरीन्द्र मोहन झा) शैशव, बाल्य, किशोर, युवा, से होकर तुम बने हो वृद्ध, तुम्हारा असली,बड़ा गुण है, हर स्थिति में स्थिर औ’ सिद्ध, ज्ञान, विज्ञान, अनुभव में गम्भीर,…
किताबों की ओर लौटो – अवधेश कुमार
किताबों की ओर लौटो – किताबों की ओर लौटो फिर से, ज्ञान के दीप जलाओ फिर से। इन पन्नों में बसी हैं कहानियाँ संघर्ष की , हर शब्द में छुपा…
शरद पुर्णिमा- राम किशोर पाठक
शरद पूर्णिमा- महामंगला छंद गीत स्वागत करती किरण, सोम देव मुस्कात। सुरभित शीतल शरद, मनभावन यह रात।। रजनी व्याकुल अजब, लगती अतिशय शांत। श्वेत रंग की वसन, व्योम दिखे कुछ…
शरद ऋतु का दस्तक -जैनेंद्र प्रसाद रवि
शरद् ऋतु का दस्तक अंधकार छंटते हीं, रवि की सवारी आया, बैठ तरु डाल पर, करते परिंदे शोर। पछियाँ जो समूह में, कोलाहल कर रहे, अचानक झुंड बना, उड़ते गगन…
बातों के ज़ख्म घर कर जाते हैं- मनु कुमारी
बातों के ज़ख्म घर कर जाते हैं चोट के ज़ख्म तो भर जाते हैं, बातों के ज़ख्म घर कर जाते हैं। सोच समझकर बोला करो यारों बोले हुए शब्द वापस…
दशहरा -दोहावली रामकिशोर पाठक
दशहरा- दोहावली उस रावण को मारिए, जिसका मन पर राज। सफल तभी यह दशहरा, कह पाएँगे आज।।०१।। करते पुतला का दहन, बनकर हम श्री राम। अंदर रावण है तना, जिसे…
हे मां तू सुन – स्नेहलता द्विवेदी
हे माँ तू सुन हे कालरात्रि महामाया सुन, हे जगदम्बे महाकाली सुन। तेरी महिमा जग कल्याणी, सब दुख है हरने वाली सुन। तू चंड -मुंड संहार करें, माँ खप्परवाली काली…