दिवाली में -रामकिशोर पाठक

दिवाली में सजाकर गाँव की गलियाँ करें रौशन दिवाली में। सजा दो फूल की लड़ियाँ लगे उपवन दिवाली में।। बताना आज है सबको तिमिर फैला घनेरा है। मिटाना है हमें…

मीठी बोली- रामपाल प्रसाद सिंह

मीठी बोली। कोयल के लिए स्वर,अनमोल सरोवर, डूबने को हर लोग,चाहते हैं दिन-रात। काक काला लिए रंग,कंठस्थ है स्वरभंग, करते बच्चों को तंग,निर्दयी पक्षी की जात। आचार-विचार से ही,पहचान मिलती…

वंदनवार सजे शारदा – रामपाल प्रसाद सिंह

वंदनवार सजे शारदा शोर हुआ अब कानन में। मदिरा सवैया भोर हुई उठ जा प्रिय जीवन, बोल रही कोयल वन में। स्वप्न निरंतर देख रही तुम, शोर हुआ अब कानन…

चरणों की भक्ति -जैनेन्द्र प्रसाद रवि

चरणों की भक्ति रूप घनाक्षरी छंद दानवों का दुनिया में अत्याचार बढ़ा जब, धरा की पुकार सुन, लिया तब अवतार। यशोदा मांँ के प्यार में, राधा के मनुहार में, नंद…

मतदान -नीतू रानी

-मतदान। आने वाला है इलेक्शन। कुछ दिन बाद है इलेक्शन आने वाले, लोग मिलेंगे तुमको बहलाने -फुसलाने वाले। जो करते थे पहले तुमसे लड़ाई और झगड़े, वही आएगा तेरे घर…

मिसाइल मैन -राम किशोर पाठक

मिसाइल मैन – महामंगला छंद (विश्व विद्यार्थी दिवस) करिए उनको नमन, जो भारत की शान। मैन मिसाइल अबुल, विश्व लिया यह जान।। था स्वभाव भी मृदुल, भरा हुआ था ज्ञान।…

कैकेई का त्याग – विधाता छंद गीत – राम किशोर पाठक

कैकेई का त्याग- विधाता छंद गीत जगत कल्याण के कारण, किया विष पान त्रिपुरारी। पुनः दुनिया बचाने को, किया है त्याग निज नारी।। निभायी राष्ट्र से नाता, लुटायी स्वप्न थी…