गुरू बिना ज्ञान

गुरू बिना ज्ञान (शिक्षक दिवस पर विशेष) रूप घनाक्षरी छंद में ऋषि-मुनि या हों संत, चाहे कोई भगवंत, किसी को भी मिला नहीं, बिना गुरु कभी ज्ञान। कभी हमें मारते…

राहगीर -रुचिका

राहगीर राह की मुसीबतों से न घबड़ा, तू है राहगीर जरा रुक,सम्भल, राह की मुसीबतों का सामना कर और आगे बढ़ता जा। बाधाएँ तेरे राह में अनेकों आएंगी मंजिल से…

शिक्षक दिवस

शक्ति छंद क्षितिज लाल है भाल हर्षित दिखे। सितंबर दिवस आज चर्चित दिखे।। अशिक्षा डगर छोड़ते वे चले। सु-शिक्षा डगर जोड़ते वे चले।। उन्हीं के दिवस पर चलो कुछ करें।…

मधुमय देश बनाना है-डॉ. स्नेहलता द्विवेदी आर्या

मधुमय देश बनाना है सुरभित सुंदर संस्कार का अद्भुत देश हमारा है, भगत सिंह गाँधी सुभाष संग हमने भी दिल हारा है। तरुणाई के प्रखर शौर्य को जनहित में रचने…

वीर जवान सरहद पर जाते-डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या ‘

वीर जवान सरहद पर जाते तन मन जगमग हो जाता है, नमन कोटिशः सब मिल गाते। मातृभूमि पर मर मिटने को, वीर जवान सरहद पर जाते। बूढ़ी माँ के आँचल…

टिशू पेपर-डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

मैं टिशू पेपर मैं!  टिशू पेपर! सभ्यता की पहचान  सौम्य सॉफ्ट आन-बान शान, हाथों से अधरों, गालों तक, जाने कहाँ-कहाँ मैं सहज पहुँचता हूँ। मैं! टिशू पेपर! स्वयं को निहारता,…