धनतेरस। रोला छंद । पावन कार्तिक मास,स्वर्ग से सुंदर भाता। त्रयोदशी का योग,कृष्ण पक्ष अति सुहाता। प्रकट हुए धनदेव, ग्रंथ[...]
Author: Dr Snehlata Dwivedi
ऋण बैकुंठ बिहारीऋण बैकुंठ बिहारी
ऋण ऋण माता का, ऋण पिता का, ऋण भाई बहन का, ऋण प्रियजनों का।। ऋण मित्र का, ऋण शत्रु का,[...]
तुमसे लगन लगी -जैनेंद्र प्रसाद रवितुमसे लगन लगी -जैनेंद्र प्रसाद रवि
तुमसे लगन लगी ग्वाल-बाल संग मिल, गोपियों के घर जाते, आदत थी छिपकर, माखन चुराने की। गांव की ग्वालन जातीं,[...]
उम्मीद का दिया अवधेश कुमारउम्मीद का दिया अवधेश कुमार
उम्मीद का दिया : एक शिक्षक की दीपावली उम्मीद का दिया जलाता हूँ, जीवन को नया अर्थ देता हूँ। कुछ[...]
दिवाली – नीतू रानीदिवाली – नीतू रानी
दिवाली। -सादगी से दिवाली। आओ बच्चों चलो मनाने मिलकर हम सब दिवाली, आएँगी सज-धज कर घर में डोली पर बैठकर[...]
दिवाली में -रामकिशोर पाठकदिवाली में -रामकिशोर पाठक
दिवाली में सजाकर गाँव की गलियाँ करें रौशन दिवाली में। सजा दो फूल की लड़ियाँ लगे उपवन दिवाली में।। बताना[...]
दीपक के कई रूप रत्ना प्रियादीपक के कई रूप रत्ना प्रिया
दीपक के कई रूप एक दीप, आशा की किरण, निराश मन की आशा | एक ज्योति, उज्ज्वल दृष्टि, नयनों की[...]
मीठी बोली- रामपाल प्रसाद सिंहमीठी बोली- रामपाल प्रसाद सिंह
मीठी बोली। कोयल के लिए स्वर,अनमोल सरोवर, डूबने को हर लोग,चाहते हैं दिन-रात। काक काला लिए रंग,कंठस्थ है स्वरभंग, करते[...]
वंदनवार सजे शारदा – रामपाल प्रसाद सिंहवंदनवार सजे शारदा – रामपाल प्रसाद सिंह
वंदनवार सजे शारदा शोर हुआ अब कानन में। मदिरा सवैया भोर हुई उठ जा प्रिय जीवन, बोल रही कोयल वन[...]
हेलो अक्टूबर अवधेश कुमारहेलो अक्टूबर अवधेश कुमार
हेलो अक्टूबर : मेरे बगीचे से : बाल कविता अक्टूबर आया लेकर मौसम सुहाना सा, सूरज मृदु , नभ नीला[...]
