अलविदा 2025… शैलेन्द्र

*अलविदा_2025.* वर्ष के इस अंतिम पड़ाव पर,जब समय की पुरानी किताब का एक और अध्याय मुड़ रहा है,मैं हृदय की गहराइयों से सबके समक्ष नतमस्तक हूँ।जो शब्द अनजाने में काँटे-से…

भोर हुआ..रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

बिंदु छंद 10 वर्ण।211 211  2 222**********************भोर हुआ अरु लाली छायी।पंकज नैनन है हर्षायी।।नाच रहे खग डाली-डाली।हाथ अथाह बजाए ताली।। मारुत पश्चिम से है आया।भाव सुवासित गाना गाया।।हर्षित हैं तरुओं…

मुझे मत मारो न पापा..अवनीश कुमार

मुझ प्यारी बिटिया के लिए लोरी बनाओ न पापा।धीमे सुरों में मुझे सुलाओ न पापा,अपनी बाहों में भरकर झूला झुलाओ न पापा।गुनगुन गुनगुन गुनगुनाओ न पापा ।गुनगुन गुनगुन गुनगुनाओ न…

सम्मान या सौदा..विनोद कुमार विमल

शिक्षा की देहरी पर दीप जले,आदर्शों में सपने पले।पर पावन उस प्रांगण में अबकुछ मौन-से मोल टँगे मिले।जिस मान का मूल चरित्र रहा,जिस गौरव की जड़ तप में थी—वह मान…

मुझे पढ़ाओ पापा..बिंदु अग्रवाल

मुझे आगे बढ़ाओ पापाहाँ मुझे पढ़ाओ पापा।न दो मुझे उंगली का सहारामुझे चलना सिखाओ पापा। किताबों का दो उपहार मुझे दहेज न तुम जमाओ पापा।मैं भी तो तुम्हारा हिस्सा हूँ…

जिंदगी का सच ..अमरनाथ  त्रिवेदी

जिंदगी आज  है कल  नहीं  मिलेगी ,दुनिया  तो  इसी  तरह  चलेगी ।बहकावे में न तू किसी के आना ,तभी तो  बहारें खुशियाँ  मिलेंगी । जमाने   महफ़िल शोर है  ज्यादा ,भूलो  न कभी  तुम अपना  वादा ।जिंदगी   भर    तो  जीना  पड़ेगा , न  बदलो   कभी…

सर्दी का असर. .भावानंद सिंह

—- धनाक्षरी छंद ————————-शीत का असर देखो,सब  पे  बराबर  है,बिछावन पर दुबके, ओढ़े कम्बल है। सर्द हवा चल रही,ठिठुर रहा तन है,हो रहा बचाव उनका,जो सबल है। दिन दीनों के…

माँ शारदे-राम किशोर पाठक

धरणी छंद वर्णिक माँ शारदे, दया दिखलाओ। दे बुद्धि को, कृपा बरसाओ।। कोई कहे, तुम्हें बलशाली।मानें सदा, तुम्हें सब काली।।माता हमें, सही समझाओ।माँ शारदे, दया दिखलाओ।।०१।। कैसे कहूँ, नहीं कुछ…

नववर्ष तुम्हारा स्वागत है..आशीष अंबर

कविता नववर्ष तुम्हारा स्वागत है,खुशियाँ मिले सबको बस यही चाहत है । नया जोश, नया उल्लास छाया है,खुशियाँ लेकर अपार नववर्ष आया है । तोड़कर नफरत भरी सब दीवारें अब,प्रेम…