Author: Swarakshi Swara

मुझे मत मारो न पापा..अवनीश कुमारमुझे मत मारो न पापा..अवनीश कुमार

0 Comments 10:51 am

मुझ प्यारी बिटिया के लिए लोरी बनाओ न पापा।धीमे सुरों में मुझे सुलाओ न पापा,अपनी बाहों में भरकर झूला झुलाओ[...]

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सम्मान या सौदा..विनोद कुमार विमलसम्मान या सौदा..विनोद कुमार विमल

0 Comments 10:30 am

शिक्षा की देहरी पर दीप जले,आदर्शों में सपने पले।पर पावन उस प्रांगण में अबकुछ मौन-से मोल टँगे मिले।जिस मान का[...]

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मुझे पढ़ाओ पापा..बिंदु अग्रवालमुझे पढ़ाओ पापा..बिंदु अग्रवाल

0 Comments 7:41 am

मुझे आगे बढ़ाओ पापाहाँ मुझे पढ़ाओ पापा।न दो मुझे उंगली का सहारामुझे चलना सिखाओ पापा। किताबों का दो उपहार मुझे[...]

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जिंदगी का सच ..अमरनाथ  त्रिवेदीजिंदगी का सच ..अमरनाथ  त्रिवेदी

0 Comments 4:09 pm

जिंदगी आज  है कल  नहीं  मिलेगी ,दुनिया  तो  इसी  तरह  चलेगी ।बहकावे में न तू किसी के आना ,तभी तो  बहारें खुशियाँ  मिलेंगी ।[...]

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सर्दी का असर. .भावानंद सिंहसर्दी का असर. .भावानंद सिंह

1 Comment 4:06 pm

—- धनाक्षरी छंद ————————-शीत का असर देखो,सब  पे  बराबर  है,बिछावन पर दुबके, ओढ़े कम्बल है। सर्द हवा चल रही,ठिठुर रहा[...]

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Ram Kishore Pathak

माँ शारदे-राम किशोर पाठकमाँ शारदे-राम किशोर पाठक

0 Comments 3:55 pm

धरणी छंद वर्णिक माँ शारदे, दया दिखलाओ। दे बुद्धि को, कृपा बरसाओ।। कोई कहे, तुम्हें बलशाली।मानें सदा, तुम्हें सब काली।।माता[...]

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ashish amber

नववर्ष तुम्हारा स्वागत है..आशीष अंबरनववर्ष तुम्हारा स्वागत है..आशीष अंबर

0 Comments 3:52 pm

कविता नववर्ष तुम्हारा स्वागत है,खुशियाँ मिले सबको बस यही चाहत है । नया जोश, नया उल्लास छाया है,खुशियाँ लेकर अपार[...]

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जाड़े की धूप.. मो आसिफ़ इक़बालजाड़े की धूप.. मो आसिफ़ इक़बाल

0 Comments 9:09 am

दुनिया के सारे इंसान बच्चे बूढ़े और जवान देखो कितनी ठंड पड़ी ठिठुर ठिठुर सब हैं परेशान।। अब तो एक[...]

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Ram Kishore Pathak

राज को न खोलिए..रामकिशोर पाठकराज को न खोलिए..रामकिशोर पाठक

0 Comments 7:02 pm

राज को न खोलिए २१२-१२१-२ राज को न खोलिए।और से न बोलिए।। प्रीति नैन में बसी।आप खास हो लिए।। शब्द-शब्द[...]

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आपस में प्यार हो.. जैनेंद्र प्रसाद रविआपस में प्यार हो.. जैनेंद्र प्रसाद रवि

0 Comments 6:58 pm

*आपस में प्यार हो*(मनहरण घनाक्षरी छंद)**********************कोई कहे लाख बुरा- करता   बुराई   नहीं, *अवगुण गुण बन-जाए सद्विचार हो*। यदि हो अभिन्न[...]

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