गीततुम मुझको नारी रहने दोअपनी अधिकारी रहने दो ।। सत्ता का लोभ नहीं मुझकोन दौलत की ही चाहत है पैरों के बंधन तोड़ मेरे निर्बन्धता में राहत है चालें तेरी…
Author: Swarakshi Swara
शब्द साधना…रामकिशोर पाठक
मरहठा माधवी छंद शब्द साधना अगर, सब्र साधना, स्वयं साधा करे।शिल्प देखिए सहज, और सीखिए, मौन बाधा हरे।।अर्थ जानिए सदा, हर्ष मानिए, गर्व आधा धरे।यत्न कीजिए सरल, आज कीजिए, ज्ञान…
देवता साक्षात् नभ से…राम किशोर पाठक
गीत (गीतिका छंद) कष्ट हरना है जगत का, आज यह समझा गए।देवता साक्षात नभ से, पूछने हैं आ गए।। पर्व पावन है सदा ही, प्रेम महिमा कह रही।भाव की सरिता…
विनय गीत…राम किशोर पाठक
आइए अब तो हमारे, साथ में कुछ बोलिए।आप कर दो चार बातें, प्रेम रस को घोलिए।। और नेकी है भला सा, आप जो पथ दे रहे।शब्द गाथा का अकिंचन, भार…
सजा है घाट- गीतिका…राम किशोर पाठक
सजा है घाट उपवन सा, जहाँ आए लिए डाला।भरी फल से सभी डाला, हुआ मोहक नदी नाला।। सभी हैं हाथ को जोड़े, नहीं छोटा बड़ा कोई।सदा पावन लगे भावन, लिए…
ताका ..राम किशोर पाठक
ताका ५-७-५, ७-७ १.सौम्य प्रसंग धरे नव उमंग रचना संग। साधना अंग-अंग शब्द दृष्टि विहंग।। २.सपने आते कुछ कह भी जाते क्या हम पाते। जो कदम बढ़ाते सब-कुछ है पाते…
वापस कर दो सुखी बनाकर…RPS अनजान
अरिल्ल छंद चार चरण में 16 16 मात्रा पदांत 211/122वापस कर दो सुखी बनाकर।@@@@@@@@@@बादल छाए नभ के ऊपर।सोनू मोनू भाग चलो घर।।मौसम कितना है मनभावन। फिर से लौट गया है…
मौन संगीत.. डॉ अजय कुमार “मीत”
मौन पड़ी मन वीणा को भावों ने झंकृत कर डालाजग उठे मौन से संगीत। कोरे कागज पर लेखनी दौड़ीआड़े-तिरछे अक्षर उभरेनिकल पड़े भावों से गीत। हृदय जाग भावों को छूआमिल…
बस थोड़ी देर पहले…अवनीश कुमार
बस थोड़ी ही देर पहले तो… बस थोड़ी ही देर पहले तो —एक रंगीन तितलीफूलों की क्यारी में नाच रही थी,मैं तितली…. मै तितली ….गा रही थी सूरज की किरणों…
आह्वान…विजय शंकर ठाकुर
सवेरे उठकर जल्दी जाओ,लोकतंत्र का पर्व मनाओ। भैया भौजी, चाचा आओ, दादा दादी को भी लाओ।मतदाता पर्ची को लेकर,कतार में सभी खड़े हो जाओ। वोट प्रतिशत को तो बढ़ाओ, संशय…