चलो एक बार फिर सेनई सरकार से मिलाते हैं,लोकतंत्र के इस पर्व कोउत्सव की तरह मनाते हैं,चलो… चुनाव कराते हैं![...]
Author: Swarakshi Swara
युग का प्रभाव..जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’युग का प्रभाव..जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद में *******************मूर्ति को तो माता कह- आरती उतारते हैं,अपनी माता को कटु, बोलते वचन हैं। घर पर [...]
इच्छा..बैकुंठ बिहारीइच्छा..बैकुंठ बिहारी
संसार में आते ही शुरू होती है… इच्छाबड़े बुजुर्गों,सगे-संबंधियों के बीच पनपती है यह इच्छा…समाज में जाकर फलती फूलती है[...]
देव दिवाली…राम किशोर पाठकदेव दिवाली…राम किशोर पाठक
कुंडलियां देव दिवाली आज है, जगमग सारे लोक।पावन क्षण है आ गया, हरने सबके शोक।।हरने सबके शोक, देव नारायण आते।गंगा[...]
भारत मांँ की बेटियांँ…राम किशोर पाठकभारत मांँ की बेटियांँ…राम किशोर पाठक
भारत माँ की बेटियांँ- प्रदीप छंद गीत धरती से अंबर तक फैली, जिसकी गाथा खास है। आज बेटियाँ भारत माँ[...]
कार्तिक पावन पूर्णिमा – गीतिका- राम किशोर पाठककार्तिक पावन पूर्णिमा – गीतिका- राम किशोर पाठक
कार्तिक पावन पूर्णिमा, महिमा कहे बखान।कट जाता है पाप सब, कर गंगा में स्नान।। भीड़ उमड़ती घाट पर, मनहर लगता[...]
कुंडलिया.रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’कुंडलिया.रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
भाषा अच्छी बोलना,मुख का है शृंगार।संधारित जिसने किये,लूट लिए संसार।। लूट लिए संसार,स्वर्ग सुंदर मुस्काया।अवतारण की चाह,देव मानस पर छाया।।[...]
देव दया कर …रामकिशोर पाठकदेव दया कर …रामकिशोर पाठक
वासुदेव छंद आश नया मन, सर्जन दो।देव दया कर, दर्शन दो।। भव भंजन तुम, कष्ट हरो।जीवन का दुख, नष्ट करो।।पाप[...]
तुम मुझको नारी रहने दो… डॉ स्वराक्षी स्वरातुम मुझको नारी रहने दो… डॉ स्वराक्षी स्वरा
गीततुम मुझको नारी रहने दोअपनी अधिकारी रहने दो ।। सत्ता का लोभ नहीं मुझकोन दौलत की ही चाहत है पैरों [...]
शब्द साधना…रामकिशोर पाठकशब्द साधना…रामकिशोर पाठक
मरहठा माधवी छंद शब्द साधना अगर, सब्र साधना, स्वयं साधा करे।शिल्प देखिए सहज, और सीखिए, मौन बाधा हरे।।अर्थ जानिए सदा,[...]
