Author: Vijay Bahadur Singh

Jainendra

गंगा-जैनेन्द्र प्रसाद रविगंगा-जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 5:51 pm

गंगा स्वर्ग से धरती पर आई, जन-जन की पातक नाशिनी गंगा। विष्णु के चरणों से निकली, शिव जटा निवासिनी गंगा।।[...]

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धरती माँ-कुमकुम कुमारीधरती माँ-कुमकुम कुमारी

0 Comments 8:01 am

धरती माँ माँ सी प्यारी धरा हमारी, हमको है प्राणों से प्यारी। देवों ने मिल इसे रचाया, वन-उपवन से इसे[...]

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हरदम पढना है-विजय सिंह नीलकण्ठहरदम पढना है-विजय सिंह नीलकण्ठ

0 Comments 1:48 pm

हरदम पढना है हम सबको हरदम पढ़ना है कुछ ना कुछ तो ज्ञान बढ़ेगा ज्ञान कलश ऐसा हो जाए जो[...]

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Dharmendra

बदलाव-धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरबदलाव-धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर

0 Comments 10:22 am

बदलाव हुआ यूँ, समय बदल गया, बचपन बदला, युवा पीढ़ी बदल गया। रहन-सहन बदला, खान-पान बदल गया। रंग बदला, ढंग[...]

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अनुराग समर्पित-दिलीप कुमार गुप्तअनुराग समर्पित-दिलीप कुमार गुप्त

0 Comments 8:16 am

अनुराग समर्पित  धवल अन्तःकरण हो जागृत उपहास किंचित न हो प्रस्फुटित मिथ्या आचार सदा विसर्जित मन कर्म वाणी हो सदा[...]

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Bhola

फिर से विद्यालय में-भोला प्रसाद शर्मा फिर से विद्यालय में-भोला प्रसाद शर्मा 

0 Comments 7:15 pm

फिर से विद्यालय में अरे! चल-चल-चल-चल मेरे भाई, करली खूब मस्ती अब करले तू पढ़ाई।  फिर से अब खुल जाऐंगे[...]

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अभिलाषा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’अभिलाषा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 2:06 pm

अभिलाषा मेरी यह तो अभिलाषा है उर को पावन नित बनाऊँ। जन-जन शिक्षा अलख जगाकर मन को सुघड़ कार्य लगाऊँ।।[...]

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Bhawanand

प्रकृति का श्रृंगार बसंत-भवानंद सिंहप्रकृति का श्रृंगार बसंत-भवानंद सिंह

0 Comments 8:19 am

प्रकृति का श्रृंगार बसंत  बह रही है वासंती बयार भिनी-भिनी खुशबू बिखेरती, चले पवन हर डार-डार हिय से करूँ इसका[...]

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