गंगा स्वर्ग से धरती पर आई, जन-जन की पातक नाशिनी गंगा। विष्णु के चरणों से निकली, शिव जटा निवासिनी गंगा।।[...]
Author: Vijay Bahadur Singh
होली-लवली वर्माहोली-लवली वर्मा
होली होली रंगों का त्योहार, फाल्गुन का पर्व विशेष। उड़ते रंग और गुलाल, मिट जाते हैं द्वेष-क्लेश। अच्छाई की जीत[...]
धरती माँ-कुमकुम कुमारीधरती माँ-कुमकुम कुमारी
धरती माँ माँ सी प्यारी धरा हमारी, हमको है प्राणों से प्यारी। देवों ने मिल इसे रचाया, वन-उपवन से इसे[...]
हरदम पढना है-विजय सिंह नीलकण्ठहरदम पढना है-विजय सिंह नीलकण्ठ
हरदम पढना है हम सबको हरदम पढ़ना है कुछ ना कुछ तो ज्ञान बढ़ेगा ज्ञान कलश ऐसा हो जाए जो[...]
बदलाव-धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरबदलाव-धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
बदलाव हुआ यूँ, समय बदल गया, बचपन बदला, युवा पीढ़ी बदल गया। रहन-सहन बदला, खान-पान बदल गया। रंग बदला, ढंग[...]
स्कूल चलें हम-विकासस्कूल चलें हम-विकास
स्कूल चलें हम उठाओ झोला उठाओ बस्ता शिक्षा पाना हुआ बहुत ही सस्ता वायरस ने किया था घर में बन्द[...]
अनुराग समर्पित-दिलीप कुमार गुप्तअनुराग समर्पित-दिलीप कुमार गुप्त
अनुराग समर्पित धवल अन्तःकरण हो जागृत उपहास किंचित न हो प्रस्फुटित मिथ्या आचार सदा विसर्जित मन कर्म वाणी हो सदा[...]
फिर से विद्यालय में-भोला प्रसाद शर्मा फिर से विद्यालय में-भोला प्रसाद शर्मा
फिर से विद्यालय में अरे! चल-चल-चल-चल मेरे भाई, करली खूब मस्ती अब करले तू पढ़ाई। फिर से अब खुल जाऐंगे[...]
अभिलाषा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’अभिलाषा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
अभिलाषा मेरी यह तो अभिलाषा है उर को पावन नित बनाऊँ। जन-जन शिक्षा अलख जगाकर मन को सुघड़ कार्य लगाऊँ।।[...]
प्रकृति का श्रृंगार बसंत-भवानंद सिंहप्रकृति का श्रृंगार बसंत-भवानंद सिंह
प्रकृति का श्रृंगार बसंत बह रही है वासंती बयार भिनी-भिनी खुशबू बिखेरती, चले पवन हर डार-डार हिय से करूँ इसका[...]
