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आजादी की वर्षगाँठ-रूचिका


Ruchika

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आजादी की 80वाँ वर्षगाँठ हम मना रहे हैं,

स्वयं ही अपनी आजादी पर इठला रहे हैं।

मगर क्या कभी सोचा है हमने इस बात पर,

 अपनी संकुचित सोच से क्या मुक्ति पा रहे हैं।

धर्म और जाति के नाम पर हो रही है लड़ाई,

अमीरी-गरीबी की बढ़ रही है देखो ये खाई,

बेईमानी और भ्र्ष्टाचार का बढ़ता बोलबाला,

क्या सत्य की राह पर हम बढ़ पा रहे हैं।

स्वयं के फायदे की देखो हो रही है राजनीति,

साम्प्रदायिक दंगे और बढ़ रही है कुरीति,

संविधान के नियमों का हो रहा उल्लंघन,

क्या अनुशासित हो हम नियमों को अपना रहे हैं।

सच्चे अर्थों में देश की आजादी का वर्षगाँठ अगर

मनाना है,

ह्रदय में देश प्रेम की भावना को निःस्वार्थ होकर जगाना है,

स्वर्णाक्षरों में अंकित हो जाए विश्वपटल पर देश का नाम

इसके लिए बन्धुत्व की भावना से हर कार्य करते जाना है।

रूचिका

प्रधान शिक्षक

राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार

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