पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik उपलब्धि-गिरीन्द्र मोहन झा

उपलब्धि-गिरीन्द्र मोहन झा


Girindra Mohan Jha

सूर्य की उपलब्धि है कि सबको रोशनी, ऊर्जा, जीवन-शक्ति मिले,

वृक्ष की उपलब्धि है, सबको फल-फूल, सुगंध, वायु, छाया मिले,

पहाड़ की उपलब्धि है, वह अडिग, अटल रहे, रक्षा करे बिन हिले-डुले,

नदियों की उपलब्धि है, सबको जल की आपूर्ति हो, समुद्र से वह जा मिले,

प्रकृति में सबकी उपलब्धि है, सबको लेश मात्र भी उपलब्ध हो जाती है,

सभी कर्त्तव्य निष्ठा, प्रतिबद्धता से करते, उपलब्धि थोड़ी भी प्राप्त हो जाती है,

आदमी की भी उपलब्धि है, सबसे बड़ी उपलब्धि है आत्मसंतुष्टि,

कर्त्तव्य पालन से शांति व संतोष मिलता है, मिलती है पुष्टि-तुष्टि,

जिस काम को करके, जितने काम को करके आत्मसंतुष्टि मिले, वह सर्वोच्च उपलब्धि है,

उससे जो फल मिले, जो परिणाम मिले, वही मेहनत का फल, सर्वश्रेष्ठ लब्धि है।

गिरीन्द्र मोहन झा

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