इंसान बदल गया है
सभी कहते हैं,
समय बदल गया है। वास्तविकता यह है,
कि इंसान बदल गया है।
स्वार्थ में जीना,
इसका पर्याय बन गया है।
पहले रिश्ते निभाना एक धर्म था,
अब मात्र सीढी का पायदान बन गया है।
पहले दूसरों की खुशी
देख कर खुश होते थे,
अब दूसरों की खुशी कांटा बन गया है।
पहले गुरु का सम्मान जीवन भर था,
अब गुरु रास्ते का मुसाफिर सा बन गया है।
पहले बड़े बुजुर्ग पथ प्रदर्शक थे,
अब ऐसा सोचना पाप हो गया है।
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है,
यही सुना करते थे।
अब व्हाट्सएप फेसबुक इंस्टा,
इसका जरिया बन गया है।
पहले प्रकृति जीने का मार्ग थी,
अब इसे नष्ट करना, जीवन का अध्याय बन गया है।।
प्रस्तुति
बैकुंठ बिहारी
स्नातकोत्तर शिक्षक कम्प्यूटर विज्ञान
उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सहोड़ा गद्दी कोशकीपुर
इन्सान बदल गया है -बैकुंठ बिहारी
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