बसंत- दोहा छंद गीत – राम किशोर पाठक
सर्दी से है काँपते, जाने कब हो अंत।
हमें बचाने आ रहा, मनहर मृदुल बसंत।।
हर मौसम में हो रहा, अक्सर सबको कष्ट।
व्याकुल करता हैं कभी, जीवन को कर नष्ट।।
अतिशय दिखे प्रकोप तब, याद करें भगवंत।
हमें बचाने आ रहा, मनहर मृदुल बसंत।।०१।।
जब-तक रहे बसंत जग, मिलता है अति हर्ष।
सारे मौसम में सदा, होता है संघर्ष।।
मानव मन की कामना, पाएँ खुशी अनंत।
हमें बचाने आ रहा, मनहर मृदुल बसंत।।०२।।
पीड़ा हो तन को जहाँ, जाता है मन हार।
ईश्वर वंदन कर रहा, सहता मौसम मार।।
पुलकित सारे जीव हो, सुरभित भू अत्यंत।
हमें बचाने आ रहा, मनहर मृदुल बसंत।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
