कहती अम्मा मुझको लल्ला। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।। कान्हा थें कितना ही नटखट। माखन मिसरी खाते चटपट।। घूमा करते सदा निठल्ला।। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।।०१।। फिर…
Category: बाल कविता
सर्दी- कहमुकरी- राम किशोर पाठक
सर्दी – कहमुकरी स्पर्श सदा कंपित है करती। रोम-रोम में सिहरन भरती।। जैसे वह हमसे बेदर्दी। क्या सखि? साजन! न सखी! सर्दी।।०१।। कभी डरूँ तो छुप मैं जाऊँ। दिन-भर जमकर…
मेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमार
माँ ने सजाये थाली में अनोखे रंग , पोषण थाली अब करेगी कुपोषण से जंग । मोटे अनाज देंगे हमें बल, गेहूँ, चावल भरें संबल। दाल हमें दे प्रोटीन प्यारा,…
बारिश और पकौड़े : बाल कविता – अवधेश कुमार
बारिश और पकौड़े : बाल कविता – अवधेश कुमार बाहर हो रही थी झमाझम बारिश, मन मे हो रही थी पकौड़े की ख्वाहिश। डर लग रहा था कैसे कहूँ…
बाल कविता -नीतू रानी
-बाल कविता शीर्षक -एक मोटा हाथी। एक मोटा हाथी झूम के आया, केला के पेड़ को सूँढ से गिराया। उसमें लटके केला को तोड़ के खाया, बहती नदी में खूब…
रसीले फल – राम बाबू राम
आम फलों का राजा है, रस से भरा रसीला है। लीची खट्टी मीठी है, यह हम सबको भाती है। बारिश की बूंदों के साथ, जामुन गिरते काले-काले, तरबूज लाल और…
अ से ज्ञ की कहानी
हिंदी दिवस 14 सितंबर पर “अ से ज्ञ की कहानी” अ से अनार, आ से आम । हिंदी है भारत का अभिमान।। इ से इमली, ई से ईख। हिंदी पढ़ना,…
बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद- राम किशोर पाठक
बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद पाँव में पाजेब मनहर बाँध अपने। नाचते हैं श्याम बनकर बाल सपने।। देखकर नंगे कदम के दाँव प्यारे। झूमता है मन मयूरा भी हमारे।।…
आओ, हम सब खेलें भाई- विजय शंकर ठाकुर
– आओ हम सब खेलें भाई – आओ, हम सब खेलें भाई, अब तो खेल की घंटी आई। भाई आओ, बहाना आओ, खेल सामग्रियों को भी लाओ, उछल कूद है,…
सपने को साकार करें हम – अमरनाथ त्रिवेदी
सपने को साकार करें हम गलत बातों में कभी नहीं पड़ेंगे, अपने सपने को साकार करेंगे । हर पल चिता छोड़ हम चिंतन को ध्याएँ , हर मुश्किल से चिंतन…