रिश्ते डोरी प्रेम की, आए मन को रास। नेह सत्य सद्भावना, लाती नवल उजास।। रिश्तों को शुचिमय सघन, रखें बनाए[...]
Category: छंद
मनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंहमनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंह
आज बच्चों में उल्लास, छुट्टी मिली है जो खास, चकचक ताजिया है, भरे जो विश्वास से। हिंदुओं का गाॅंव प्यारा,[...]
छंद: गीतिका – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’छंद: गीतिका – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
बच्चों को सिखलाना होगा। सही मार्ग ले जाना होगा।। बच्चे तो हैं मन के सच्चे, यही कर्म दुहराना होगा। होते[...]
मनहरण घनाक्षरी:- एस. के. पूनममनहरण घनाक्षरी:- एस. के. पूनम
शीर्षक: कभी रथ खींचिए मंदिर की ओर चलें, मिलेगी जीने की राह, जय बोलो जगन्नाथ, नमन तो कीजिए। हजारों हैं[...]
विधा- रूप घनाक्षरी: जैनेन्द्र प्रसाद रविविधा- रूप घनाक्षरी: जैनेन्द्र प्रसाद रवि
किसान “”””””””””””””””” फसल बोने के पूर्व, खेतों की जुताई हेतु, सुबह ही चल देते, हल बैल ले के संग। हरियाली[...]
रूप घनाक्षरी- एस.के.पूनमरूप घनाक्षरी- एस.के.पूनम
शुष्क ऋतु गया बीत, सीख गया कुछ रीत, वक्त की प्रतीक्षा कर, मत करना प्रहार। गगन में बदरी छाई,[...]
अनंत शिल्पी यहाँ-एस.के.पूनमअनंत शिल्पी यहाँ-एस.के.पूनम
छंद:-मनहरण घनाक्षरी (अनंत शिल्पी यहाँ) विभुतियों का संसार,सितारे हैं मंच पर, पटल शोभित जहाँ,शब्दों का खेल वहाँ। उकेरे भावनाओं को,[...]
मुखौटा-मुखौटा-
सुंदर मुखौटा लिए चेहरे पर, ईमानदारी का रंग चढ़ाया था। ईमान बेच कर उपदेश दे रहे, गीता का कसम खाया[...]
शीत-एस.के.पूनमशीत-एस.के.पूनम
छंद:-मनहरण घनाक्षरी “शीत” सघन है काली रात,रौशनी है थोड़ी-थोड़ी, बंद हुआ घर-द्वार,जाड़े का आलम है। सूर्य ढ़का तुहिन से,घूप थोड़ा[...]
