अंधेरा था घनघोर, संतरी थे चहुँओर, माया ने बिछाई जाल, दानवों पर प्रहार। वेदना को भूल कर, पलना में[...]
Category: छंद
श्री कृष्ण-चरित-माला- हर्ष नारायण दासश्री कृष्ण-चरित-माला- हर्ष नारायण दास
ॐ श्री पुरुषोत्तम स्वामी। सर्वातीत सर्वघट-गामी।। निर्गुण मायारहित अनन्ता। मायाधीश सगुण भगवन्ता।। परम दयामय लीलाधारी। पृथिवी-भार-हरन अवतारी।। भव-दुख-भंजन, दुष्ट-विनाशी। बन्दीगृह[...]
भारत की पहचान तिरंगा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’भारत की पहचान तिरंगा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
आजादी की शान तिरंगा। भारत की पहचान तिरंगा।। फलित साधना वर्षों की है, करते हम गुणगान तिरंगा। केसरिया साहस से[...]
मनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनममनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनम
भारत के तिरंगे में, शोभित हैं तीनों रंग, फहराए हवा संग, झुका आसमान है। जल,थल,नभ सेना, तत्पर रक्षा में सदा,[...]
गीतिका – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’गीतिका – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
संत शिरोमणि कवि तुलसी की, महिमा गाते जाइए। पावन निर्मल भक्ति-भाव को, हृदय बसाते जाइए। रामचरितमानस अति सुंदर, ज्ञान-विभूषित ग्रंथ[...]
रूप घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’रूप घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
यहाँ नाग पंचमी में, पूजे जाते नागदेव, शंकर पहनते हैं, बनाकर गले हार। स्वार्थ के हो वशीभूत, मदारी पकड़ते हैं,[...]
दोहावली – कुमकुम कुमारी “काव्याकृति”दोहावली – कुमकुम कुमारी “काव्याकृति”
देवाधिदेव महादेव दया सिंधु शिव जी सदा,करते हैं कल्याण। जो भी आते हैं शरण,पाते वो वरदान।। बाबा भोलेनाथ को, पूजे[...]
मनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनममनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनम
जलता है रात-भर, स्नेह भरा यह दीप, बुझ गया यादें छोड़, सविता के आने से। जल उठे साँझ ढले, बाती-तेल[...]
रूप घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’रूप घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
तूफां से न घबराते, अपनी मंजिल पाते, जीवन के डगर की, होती न आसान राह। चट्टानों पे बीज बोते, धुन[...]
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
पावन है देवघर, भोलेनाथ की नगरी, आज सारी दुनिया में, बना सिरमौर है। किसानों में खुशहाली, खेतों बीच हरियाली, पावन[...]
