Category: छंद

ram किशोर

बैशाखी का पर्व है: विधा: मनहरण घनाक्षरी– रामकिशोर पाठकबैशाखी का पर्व है: विधा: मनहरण घनाक्षरी– रामकिशोर पाठक

0 Comments 5:01 pm

कहते मेष संक्रांति, है विषुवत संक्रांति, फसल कटाई शांति, बैशाखी का पर्व है। सूर्य का मेष प्रवेश, पंज प्यारे धर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
ram किशोर

महावीर – रामकिशोर पाठकमहावीर – रामकिशोर पाठक

0 Comments 8:38 am

छह सौ साल ईसा पूर्व का, वैशाली शुभ धाम। कुण्डग्राम में जन्म हुआ, बर्धमान था नाम।। थी चैत्र शुक्ल की[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
ram किशोर

नूतन वर्ष – रामकिशोर पाठकनूतन वर्ष – रामकिशोर पाठक

0 Comments 1:32 pm

लो नूतन वर्ष सनातन का, आज शुरू होने आया। चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा यही, प्रथम दिवस है कहलाया। प्रकृति लिए[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
ram किशोर

चिपको आंदोलन- रामकिशोर पाठकचिपको आंदोलन- रामकिशोर पाठक

0 Comments 9:33 pm

अंधाधुंध वन कटने लगे, चलने लगी कुल्हाड़ियाँ। होने लगा विनाश वनों का, थी शहर की तैयारियाँ। राजस्थान जहॉं पहले हीं,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
ram किशोर

केसर हो जाइए- विधा- मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठककेसर हो जाइए- विधा- मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक

0 Comments 8:23 pm

इस बार की होली में, मधु रस हो बोली में, प्रेम लाली ले झोली में, गले से लगाइए। लाल पीले[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: विधा- दोहावली- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: विधा- दोहावली- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 10:33 pm

दिवस राष्ट्र विज्ञान का, लाया नव उल्लास। रमण खोज की याद कर, उर में भरें उजास।। चिंतन कर विज्ञान का,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
ram किशोर

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस- रामकिशोर पाठकराष्ट्रीय विज्ञान दिवस- रामकिशोर पाठक

0 Comments 8:51 pm

हम करें विज्ञान की बातें, देश के उत्थान की बातें। विज्ञान और नवाचार में, युवाओं को सशक्त बनाना। राष्ट्रीय विज्ञान[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

शीर्षक: निरख सुहानी भोर- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’ विधा- मनहरण घनाक्षरीशीर्षक: निरख सुहानी भोर- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’ विधा- मनहरण घनाक्षरी

0 Comments 3:40 pm

निरख सुहानी भोर, सुखद विहंग शोर, प्राणवायु का सहर्ष, अनुभव कीजिए। ललित प्राची की लाली, भृंगी बाग मतवाली, भीनी गंध[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
ram किशोर

शिवरात्रि विशेष दोहावली- रामकिशोर पाठकशिवरात्रि विशेष दोहावली- रामकिशोर पाठक

0 Comments 7:01 pm

प्रकृति वधू का रूप ले, पुलकित रही निहार। पुरुष प्रकृति का है मिलन, मन में लिए विचार।। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें