लो नूतन वर्ष सनातन का, आज शुरू होने आया। चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा यही, प्रथम दिवस है कहलाया। प्रकृति लिए उल्लास जहॉं है, कण-कण भी है मुस्काया। धन-संपदा से पूर्ण…
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चिपको आंदोलन- रामकिशोर पाठक
अंधाधुंध वन कटने लगे, चलने लगी कुल्हाड़ियाँ। होने लगा विनाश वनों का, थी शहर की तैयारियाँ। राजस्थान जहॉं पहले हीं, वृक्ष रक्षा में नारियॉं। तीन सौ तिरसठ जानें दी, अमृता…
केसर हो जाइए- विधा- मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक
इस बार की होली में, मधु रस हो बोली में, प्रेम लाली ले झोली में, गले से लगाइए। लाल पीले होते नहीं, धैर्य कभी खोते नहीं, गुलाबी रंग होठ से,…
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: विधा- दोहावली- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’
दिवस राष्ट्र विज्ञान का, लाया नव उल्लास। रमण खोज की याद कर, उर में भरें उजास।। चिंतन कर विज्ञान का, लाएँ अभिनव सोच। अन्वेषण की चाह में, नहीं करें संकोच।…
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस- रामकिशोर पाठक
हम करें विज्ञान की बातें, देश के उत्थान की बातें। विज्ञान और नवाचार में, युवाओं को सशक्त बनाना। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस सदा, जागरूकता चाहे लाना। केंद्रित रखकर इसी भाव को,…
शीर्षक: निरख सुहानी भोर- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’ विधा- मनहरण घनाक्षरी
निरख सुहानी भोर, सुखद विहंग शोर, प्राणवायु का सहर्ष, अनुभव कीजिए। ललित प्राची की लाली, भृंगी बाग मतवाली, भीनी गंध प्रसूनों की, तन-मन लीजिए। कोयल की कूक प्यारी, लता की…
शिवरात्रि विशेष दोहावली- रामकिशोर पाठक
प्रकृति वधू का रूप ले, पुलकित रही निहार। पुरुष प्रकृति का है मिलन, मन में लिए विचार।। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी, विदित सकल संसार। इसी दिवस ब्रह्माण्ड का, शुभदारंभ प्रसार।। शैलसुता…
दोहावली – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’
गिरिजापति भूतेश शिव, आया हूँ दरबार। विनती बारंबार है, करिए बेड़ा पार।। अंतक अक्षय आप हो, उमापति विश्वनाथ। नीलकंठ शिवमय सदा, उमा शक्ति है साथ।। शादी भोलेनाथ की, महिमा अपरंपार।…
सच में जीवन जीना सीखें – अमरनाथ त्रिवेदी
रोते को हँसाना सीखें, जग में नाम कमाना सीखें। कभी न झगड़ा झंझट करें, दिल खुशियों से भरा करें। मन से दुख को जाएँ भूल, यही जीवन में रखना वसूल। जीवन में सुख-दुःख…
मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक
आधार का वर्ग मान, लंब का भी वर्ग ज्ञान, दोनों के योगफल को, ज्ञात कर लाइए। तीसरी भुजा कर्ण लें, उसका वर्ग कर लें, योगफल के मान से, तुल्य कर…