दुर्लभ गुरु ज्ञान है मित्र-पुत्र माता-पिता- मिलते हैं सौभाग्य से, गुरु तो साक्षात कृष्ण, राम के समान हैं। हजारों जन्मों[...]
Category: छंद
गुरु से विनय – राम किशोर पाठकगुरु से विनय – राम किशोर पाठक
गुरु से विनय- किशोर छंद गीत हम-सब छोटे बालक पढ़ने, आएँ हैं। गुरुवर लाख बुराई हममें, पाएँ हैं।। सारे छोड़े[...]
पितृ तर्पण -राम किशोर पाठकपितृ तर्पण -राम किशोर पाठक
पितृ तर्पण – निश्छल छंद देख रहें हैं पूर्वज अपने, करिए जाप। भूल गए या याद किए हैं, उनको आप।।[...]
स्वास्थ्य रक्षा -राम किशोर पाठकस्वास्थ्य रक्षा -राम किशोर पाठक
स्वास्थ्य रक्षा – सरसी छंद स्वास्थ्य हमारा सही रहे तो, रहती है मुस्कान। काम समय से होता रहता, मिलती नव[...]
परशुराम जयंती- राम किशोर पाठकपरशुराम जयंती- राम किशोर पाठक
दोहा छंद चार सनातन युग शुभद, करते ग्रंथ बखान। कालखंड सबके अलग, करे सभी गुणगान।।०१।। सतयुग का प्रस्थान था, त्रेतायुग[...]
आतंक एक नासूर – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’आतंक एक नासूर – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
रुप घनाक्षरी छंद में सीमाओं की रक्षा हेतु, कुर्बानी भी देनी होगी, कभी नहीं अधिकार, माँगा जाता हाथ जोड़। बार-बार[...]
अफवाहों के दौर में – राम किशोर पाठकअफवाहों के दौर में – राम किशोर पाठक
छंद – कुण्डलिया अफवाहों के दौर में, रहिए ज़रा सतर्क। दिल से करके देखिए, मिलता क्या है तर्क।। मिलता क्या[...]
कुँवर सिंह – राम किशोर पाठककुँवर सिंह – राम किशोर पाठक
मनहरण घनाक्षरी मृगराज सी हुँकार, चमकती तलवार, अंग्रेजों को ललकार, किए जो कमाल थे। उम्र अस्सी किए पार, यौवन सी[...]
जीने का अधिकार – राम किशोर पाठकजीने का अधिकार – राम किशोर पाठक
छंद – दोहा जीने का अधिकार है, सबको एक समान। जीव-जंतु सबका करें, रक्षा बन बलवान।।१।। रखिए हरपल हीं यहॉं,[...]
दर्पण- राम किशोर पाठकदर्पण- राम किशोर पाठक
छंद – दोहा किरणें आती जो रही, लौटाती उस ओर। सतह परावर्तक सदा, कहलाती वह छोर।। सतह परावर्तन करे, दर्पण[...]
