Category: प्रेम

S K punam

प्रेम – एस.के.पूनमप्रेम – एस.के.पूनम

0 Comments 3:54 pm

  ऊँ कृष्णाय नमः विधाता छंद विषय:-प्रेम – एस.के.पूनम करें हम प्रेम जीवन में, सुखद परिणाम हम पायें। मिटा कर[...]

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Ram Kishore Pathak

राज को न खोलिए..रामकिशोर पाठकराज को न खोलिए..रामकिशोर पाठक

0 Comments 7:02 pm

राज को न खोलिए २१२-१२१-२ राज को न खोलिए।और से न बोलिए।। प्रीति नैन में बसी।आप खास हो लिए।। शब्द-शब्द[...]

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Ram Kishore Pathak

फिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठकफिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठक

0 Comments 4:06 pm

कहती अम्मा मुझको लल्ला। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।। कान्हा थें कितना ही नटखट। माखन मिसरी खाते चटपट।। घूमा[...]

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Chiteshwar Jha

अधूरे प्रेम कहानी की किताब – चित्तेश्वर झाअधूरे प्रेम कहानी की किताब – चित्तेश्वर झा

0 Comments 5:43 pm

अधूरे प्रेम कहानी की किताब : हम वो किताब हैं जिसके आखिरी पन्नों पर दिल दस्तक देती है और मांगती[...]

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Snehlata dwedi

करवा चौथ -स्नेहलता द्विवेदीकरवा चौथ -स्नेहलता द्विवेदी

0 Comments 2:47 pm

पिय मन भायो मैं तो सखी बस प्रेम पुजारन, पिय के हिय में रहूँ सिया बन। मैं भोली हूँ प्यार[...]

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भावुक हूं मैं.. डॉ स्वराक्षी स्वराभावुक हूं मैं.. डॉ स्वराक्षी स्वरा

0 Comments 10:42 am

हां,मैं भावुक ही तो हूंतभी तो सह नहीं पातीहल्की सी भी चोट,फिर चाहे वो शरीर पर हो    या कि लगे[...]

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लिखी हूं प्रेम पाती प्रिय- एस के पूनमलिखी हूं प्रेम पाती प्रिय- एस के पूनम

0 Comments 10:35 am

विधाता छंद। विधान-1222*4(लिखी हूँ प्रेम पाती प्रिय)(1)गगन हो या धरा पर हो,तुम्हें सत्कार जन-जन में। तुम्हीं को देख जीती हूँ,प्रणय[...]

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माँ – अश्मजा प्रियदर्शिनीमाँ – अश्मजा प्रियदर्शिनी

0 Comments 5:22 pm

भू-तल पर जन-जीवन की तुम आशा हो। माँ तुम चराचर जगत की परिभाषा हो। तुम हीं लक्ष्मी, सरस्वती, तुमसे जीवन[...]

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प्रेम की पराकाष्ठा- अवनीश कुमारप्रेम की पराकाष्ठा- अवनीश कुमार

1 Comment 5:32 pm

एक आहट जैसे प्रिय के पाँवों की हल्की चाप, एक सुखद अहसास ऐसे जैसे स्नेह रस से सींचती माँ, एक[...]

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