Category: प्रेम

Suresh-kumar-gaurav

विदाई की बेला-सुरेश कुमार गौरवविदाई की बेला-सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 9:33 pm

काल चक्र के समय काल को, विदा करने की भी ठानी गई चंद सेकेंड,मिनट, घंटे,पहर को, सबके द्वारा मानी भी[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
suresh kumar gaurav

मित्रता की सार्थकता-सुरेश कुमार गौरवमित्रता की सार्थकता-सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 7:58 pm

जब जीवन में मिलते हैं सच्चे और अच्छे मित्र मन मस्तिष्क में उभरते हैं सार्थक जीवन चित्र! मित्र है वह[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Rajesh

राधाकृष्ण से सीताराम बनना है प्रेम- राजेश कुमार सिंहराधाकृष्ण से सीताराम बनना है प्रेम- राजेश कुमार सिंह

0 Comments 8:46 pm

वह प्रेम है ही नहीं जिसका उद्देश्य शरीर को पाना है। हर युग में प्रेम का मतलब राधा-कृष्ण बन जाना[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

माँ-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’माँ-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 8:34 pm

सभी देवियों से बढ़कर माँ ऊंचा है तेरा दर्जा, नहीं उतार पाऊंगा कभी जीवन भर मैं तेरा कर्जा। पहली बार[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Arvind Kumar Amar

बेटी:- अरविंद कुमार अमरबेटी:- अरविंद कुमार अमर

0 Comments 4:13 pm

छै येहा धारना दूनिया के, बेटी पराई होते छै। पर बिना बेटियौ के जग में, तकदीर सब के सुतले छै।[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Kumkum

बेटी धन अनमोल – कुमकुम कुमारीबेटी धन अनमोल – कुमकुम कुमारी

0 Comments 11:39 am

मेरे जन्म से पापा क्यों डरते हो, मुख अपना मलिन क्यों करते हो? बेटी हूँ कोई अभिशाप नहीं, फिर मन[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Manu

फूल मनहरण घनाक्षरी-मनु कुमारीफूल मनहरण घनाक्षरी-मनु कुमारी

0 Comments 1:54 pm

फूल मनहरण घनाक्षरी आओ बनें हम फूल, गम सारे जायें भूल प्रेम माल बनूं मैं, देख तू संसार के! बनके[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Kumkum

मनहरण घनाक्षरी – कुमकुम कुमारीमनहरण घनाक्षरी – कुमकुम कुमारी

0 Comments 11:58 pm

मनहरण घनाक्षरी चले वसंती बयार, छाया सबपे खुमार, होकर हंस सवार, आई चन्द्रकांति माँ। छेड़ दी वीणा की तार, झंकृत[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें