Category: प्रेम

माँ – अश्मजा प्रियदर्शिनीमाँ – अश्मजा प्रियदर्शिनी

0 Comments 5:22 pm

भू-तल पर जन-जीवन की तुम आशा हो। माँ तुम चराचर जगत की परिभाषा हो। तुम हीं लक्ष्मी, सरस्वती, तुमसे जीवन[...]

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प्रेम की पराकाष्ठा- अवनीश कुमारप्रेम की पराकाष्ठा- अवनीश कुमार

1 Comment 5:32 pm

एक आहट जैसे प्रिय के पाँवों की हल्की चाप, एक सुखद अहसास ऐसे जैसे स्नेह रस से सींचती माँ, एक[...]

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Ratna Priya

प्रतिकृति – रत्ना प्रियाप्रतिकृति – रत्ना प्रिया

0 Comments 10:09 am

मातृ-भक्ति का मुझे मिला, जो प्रसाद नौनिहाल का, नूतन दिवस है मेरी प्रतिकृति के दसवें साल का। नन्हीं कली का[...]

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Devkant

प्रेम दिव्य अनुभूति परम है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्रेम दिव्य अनुभूति परम है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 10:01 pm

प्रेम दिव्य अनुभूति परम है आओ हम विश्वास बढ़ाएँ। प्रेम मग्न हों प्रभु को भजकर, अंतर्मन नव भाव जगाएँ। प्रेम[...]

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Shanti Kumari

पिता – शांति कुमारीपिता – शांति कुमारी

0 Comments 8:46 am

एक उम्मीद है एक आस हैं पिता परिवार की हिम्मत और विश्वास है पिता बाहर से सख्त अंदर से नर्म[...]

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Suresh-kumar-gaurav

विदाई की बेला-सुरेश कुमार गौरवविदाई की बेला-सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 9:33 pm

काल चक्र के समय काल को, विदा करने की भी ठानी गई चंद सेकेंड,मिनट, घंटे,पहर को, सबके द्वारा मानी भी[...]

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suresh kumar gaurav

मित्रता की सार्थकता-सुरेश कुमार गौरवमित्रता की सार्थकता-सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 7:58 pm

जब जीवन में मिलते हैं सच्चे और अच्छे मित्र मन मस्तिष्क में उभरते हैं सार्थक जीवन चित्र! मित्र है वह[...]

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