हां,मैं भावुक ही तो हूंतभी तो सह नहीं पातीहल्की सी भी चोट,फिर चाहे वो शरीर पर हो या कि लगे[...]
Category: प्रेम
लिखी हूं प्रेम पाती प्रिय- एस के पूनमलिखी हूं प्रेम पाती प्रिय- एस के पूनम
विधाता छंद। विधान-1222*4(लिखी हूँ प्रेम पाती प्रिय)(1)गगन हो या धरा पर हो,तुम्हें सत्कार जन-जन में। तुम्हीं को देख जीती हूँ,प्रणय[...]
माँ – अश्मजा प्रियदर्शिनीमाँ – अश्मजा प्रियदर्शिनी
भू-तल पर जन-जीवन की तुम आशा हो। माँ तुम चराचर जगत की परिभाषा हो। तुम हीं लक्ष्मी, सरस्वती, तुमसे जीवन[...]
प्रेम की पराकाष्ठा- अवनीश कुमारप्रेम की पराकाष्ठा- अवनीश कुमार
एक आहट जैसे प्रिय के पाँवों की हल्की चाप, एक सुखद अहसास ऐसे जैसे स्नेह रस से सींचती माँ, एक[...]
रोटी और चाँद-शिल्पी रोटी और चाँद-शिल्पी
प्रेम है राजू को केवल रोटी और चाँद से रोटी जो मिटाती है भूख उसकी देती है उसे नींद, संतोष[...]
प्रतिकृति – रत्ना प्रियाप्रतिकृति – रत्ना प्रिया
मातृ-भक्ति का मुझे मिला, जो प्रसाद नौनिहाल का, नूतन दिवस है मेरी प्रतिकृति के दसवें साल का। नन्हीं कली का[...]
प्रेम दिव्य अनुभूति परम है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्रेम दिव्य अनुभूति परम है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
प्रेम दिव्य अनुभूति परम है आओ हम विश्वास बढ़ाएँ। प्रेम मग्न हों प्रभु को भजकर, अंतर्मन नव भाव जगाएँ। प्रेम[...]
पिता – शांति कुमारीपिता – शांति कुमारी
एक उम्मीद है एक आस हैं पिता परिवार की हिम्मत और विश्वास है पिता बाहर से सख्त अंदर से नर्म[...]
मां – अंजली कुमारीमां – अंजली कुमारी
पृथ्वी पर जीवन का अंकुर फूटा, धरा पर हरियाली छाई है । हर जीव जगत का वंश बढ़ाने, स्त्रीत्व चरम[...]
मुखौटा-मुखौटा-
सुंदर मुखौटा लिए चेहरे पर, ईमानदारी का रंग चढ़ाया था। ईमान बेच कर उपदेश दे रहे, गीता का कसम खाया[...]
