विधा:-रूपघनाक्षरी (सुरक्षित रहे प्राण) तरु की पत्तियां झड़ी, मंजरी भी गिर पड़ी, पतझड़ के मौसम का यही है पहचान। चल[...]
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कसक – गौतम भारतीकसक – गौतम भारती
ख्वाहिशें रह गई , दिल में चुभता रहा । बनके बे ज़ुबाँ तुम्हें तकता रहा ।। आश में मैंने जो[...]
मन की बात – रत्नेश पण्डित पाण्डेयमन की बात – रत्नेश पण्डित पाण्डेय
बड़े दिनों बाद वह, घर अपने वापस आया बेटी के लिए कुछ गुड्डे-गुड़िए, बेटे को किताबें लाया। बच्चों में कैसा[...]
बस इतनी सी चाह- नीतू रानीबस इतनी सी चाह- नीतू रानी
बस इतनी सी चाह, हम हो जाते लापरवाह। बस इतनी सी चाह, जब रास्ते चलने लगते हैं तो भटक जाते[...]
पाप कर्म से डरें- एस.के.पूनमपाप कर्म से डरें- एस.के.पूनम
विद्या:-मनहरण घनाक्षरी सीताराम-सीताराम,नयनाभिराम राम, प्रातःकाल नाम लेके,सूर्य को नमन करें। संसार है आलोकित,सूरज के प्रकाश से, ऊर्जा का संचार कर,तन[...]
मेरी अभिलाषा- जयकृष्णा पासवानमेरी अभिलाषा- जयकृष्णा पासवान
मैं पंछी बन उन्मुक्त गगन में, दुनियां का भ्रमण करुं। काली-घटा की बलखाती बादल में भींग जाऊं।। यह मेरी अभिलाषा[...]
आहट – जयकृष्णा पासवानआहट – जयकृष्णा पासवान
वक्त अभी ठहरने का है, और समय बहुत परेशान हो- गया है। मन का अभी सुनिए मत, दिल अभी लहू-लुहान[...]
गंगा अब मैली नहीं- कंचन प्रभागंगा अब मैली नहीं- कंचन प्रभा
सुनाई देती है वही सुरीले पंछी की चहचहाहट फिर से है हवाओं में शीतल सी वही गीतों की गुनगुनाहट फिर[...]
भविष्य के प्रति आशा -अमरनाथ त्रिवेदीभविष्य के प्रति आशा -अमरनाथ त्रिवेदी
भविष्य बनने से पहले , इतिहास न बनो तुम । कर्त्तव्य के आलोक को , विस्मृत न करो तुम ।[...]
इंसान बनके दिखलाओ -अवनीश कुमारइंसान बनके दिखलाओ -अवनीश कुमार
हुए स्वार्थी और लोभी आज के मानव समझ नही ये बन बैठे है दानव काम ,क्रोध,मोह ,लोभ के पाश में[...]
