ॐ ब्रम्ह का स्वरूप – डॉ स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या

संगीत प्रकृति का ॐ सुनो, अनहद का यह नाद सुनो। खुद में खुद के होने का भी, सुर सुंदर ओंकार सुनो। कहाँ शुरू यह जीवन होगा, अंत कहाँ है प्राण…

अहिंसा के पुजारी महावीर- अमरनाथ त्रिवेदी

जैन धर्म के महापर्व के सुखद अवसर को  हम जानें । २४ वें तीर्थंकर भगवान महावीर को , हम  सभी  भक्ति भाव से  मानें । कुंडलपुर में भगवान महावीर का…

कालरात्रि माँ- रूचिका

  माँ कालरात्रि संकट दूर करो देवी त्रिनेत्री। रोग नाशिनी, दया करो माँ दुर्गे जग तारिणी। जय चामुंडा, साहस भर देती जग कल्याणी। अष्टभुजी माँ, चंड मुंड विनाशिनी आदि भवानी।…

नौ रूपों में दुर्गा माता – अमरनाथ त्रिवेदी

नौ  रूपों  में  दुर्गा माता  की  पूजा, परम पावन दुर्गा पूजा कहलाती है। नौ  दिनों  के  निरंतर  तपश्चरण  से, हृदय में अपार श्रद्धा उमड़ आती है ।। प्रथम पूजा  होती  …

माँ कात्यायनी- डॉ स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

  ऋषि कात्यायन की हे सुता, यह दर्प तुम्हारा अद्भुत है। यह रूप तुम्हारा अद्भुत है, सौंदर्य तुम्हारा अद्भुत है। ज्योति द्युति प्रकृति अद्भुत, अनुराग तुम्हारा अद्भुत है। महिषासुर मर्दनी…

भगवान विश्वकर्मा- अमरनाथ त्रिवेदी

सजी धजी यह धरा सुहानी , कितनी  प्यारी   लगती  है। विश्वकर्मा जी की कृपा मात्र से , यह  छटा  निराली  लगती   है।। अभियंता का काम जगत में, यह  अभियंता  ही …