विजयादशमी पर्व का महिमा महान है, नीलकंठ चिड़िया का, शुभ होता है दर्शन। सुबह से शाम तक पक्षी का दीदार करें, सफल उद्योग होते, ये शास्त्रों में है वर्णन। नील…
Category: Bhakti
For the attainment of God in the world, for the welfare of the person, one has to do spiritual practice for salvation. For this, Bhakti is the best. Therefore, devotion to God and having prayer and meditation is called Bhakti.
भवानी सुन – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या ‘
ममतामयी मातु भवानी सुन, आद्या जननी तू सदगति दे। इहलोक में जगदम्बा सुन ले, भावप्रीता मुझे शरणागति दे। ममतामयी मातु भवानी सुन.. मैं मूढ़मति तू सुन आर्या, हे महातपा मुझे…
अष्टमी का महाव्रत – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
भारत में नर-नारी समूल संकट हारी, श्रद्धा पूर्वक रखते, अष्टमी का उपवास। गृहस्थ हो याकि संत, भक्ति भाव में हो रत, सबसे उत्तम व्रत, रोग दोष करे नाश। मंगल कल्याणकारी…
माता की महिमा – संजय कुमार
माता की महिमा माता की महिमा अपरंपार करती हैं अपनी भक्तों का उद्धार। जो भी इनकी शरण मे आया दुःख दूर हुआ,हर सुख पाया।। माता दूर करती है शरणागत की,…
प्रभु सुन लें पुकार- एस.के.पूनम
🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-रूपघनाक्षरी (प्रभु सुन लें पुकार) रात है अमावस्या की, प्रकाश है खद्योतों से, हृदय में ध्यान कर,सूर्य प्रभा से संसार। हिया में विकार भरा, सोच कर परेशान, प्रयास…
मुझे भी तू चुन ले – स्नेहलता द्विवेदी ’आर्या’
जगत मां तू सुन ले मुझे भी तो चुन ले, शरण तेरे आई खड़ी हूं यूं कब से। तू सबसे हो न्यारी, तू लगती है प्यारी शरण तेरे आई, नमस्ते…
विनती सुनो हमार – मनु रमण “चेतना”
जय -जय अम्बे,जय जगदम्बे, सुन लो अरज हमार। सकल जगत की तू हो माता , विनती सुनो हमार। तू हो माता ब्रह्म स्वरूपा, अविगत,अलख, अनादि अनूपा। सत्य सनातन तू हो…
माता की आराधना – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
प्रभाती पुष्प 🌹🙏🌹🙏🌹🙏 माता की आराधना आश्विन पावन मास, मंगल दिवस खास, भक्त जन करते हैं माता की आराधना। शरण में जो भी आते, मन चाहा वर पाते, मन में…
दुर्गार्चना – एस.के.पूनम
🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-रुप घनाक्षरी विषय:-दुर्गार्चना/नवरात्रि विराजीं हैं घर-घर, प्रफुल्लित तन-मन, थाल सजी दीप जले,अब आरती उतार। मिष्ठान का भोग लगे, वितरण प्रसाद का, अनुगत समर्पण,श्रद्धालुओं की कतार। लोभ मोह त्याग…
मनहरण घनाक्षरी – एस.के.पूनम
🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-मनहरण घनाक्षरी बिखरे गुलाब पुष्प, आईं सिंहवासिनी माँ, पथ को बुहारते ही,आप सदा रहिए। सोलह श्रृंगार कर, बैठी हैं आसन पर, चरण वंदना कर,आशीर्वाद लीजिए। फल-फूल कंदमूल, पुष्प…