नमन तुम्हें है विधाता – राम किशोर पाठक

श्याम समवर्णिक छंद नमन तुम्हें है विधाता।सबल हमें जो बनाता।।अगर तुम्हें रास आता।सहज बने सर्व ज्ञाता।। हम-सब अज्ञान पाले।मगन सभी ज्ञान वाले।।तुम करुणा दान दे दो।अजय बने मान दे दो।।…

हे मां देवी – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

दंडक छंद6,11,15,10 हे माॅं देवी,कल्याणी पापहरणी,तेरी जय हो महागौरी,कर अघ का धावन। जले दीप,-धर्म द्वार दिन-रात,भजन कीर्तन करे प्रसन्न,स्नेहिल मन ऑंगन। हे दिव्या, श्वेतांबरी माते,चढ़ाऊॅं रौली कुमकुम फल,करुॅं श्लोक पाठन।…

कन्या वंदन – राम किशोर पाठक

माता घर-घर में आती है, धर कन्या का रूप।पाठ पढ़ाती शक्ति बोध का, उसके हर स्वरूप।।शैलसुता सी किलकारी दे, घर वासी हो भूप।ब्रह्मचारिणी सदा किशोरी, होती बड़ी अनूप।। नवयौवना चंद्रघंटा…

माता की आराधना – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

दुर्गा मांँ के मंदिर में, जलता अखंड ज्योति, आओ सब मिल करें, माता की आराधना। नैवेद्य कर्पूर धूप, चंदन अक्षत दीप, हाथ लेके नर-नारी, करते हैं साधना। श्रद्धा भक्ति भाव…

मां भवानी – अमरनाथ त्रिवेदी

शक्ति की  अधिष्ठात्री देवीदुर्गा नाम से प्रख्यात हैं ।होती इनकी नौ रूपों की पूजा ,यह पावन पर्व बड़ा विख्यात है । माँ का नाता पुत्र से होता ,और पुत्र का…

माता रानी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

माता रानी का भजनआंचलिक भाषा में तोहर माथे में मुकुट गले हार सोहे ला,माई दसों हाथ तोहर हथियार सोहे ला।कर में कंगन सोहे भाल सोहे बिंदिया,असुरों के देख तोहे आवे…

हे मां तू सुन – स्नेहलता द्विवेदी

हे माँ तू सुन हे कालरात्रि महामाया सुन, हे जगदम्बे महाकाली सुन। तेरी महिमा जग कल्याणी, सब दुख है हरने वाली सुन। तू चंड -मुंड संहार करें, माँ खप्परवाली काली…

उपवन नवरात्र का- सार छंद- रामकिशोर पाठक

उपवन नवरात्र का- सार छंद आज हमारा पुष्पित उपवन, देख चकित संसार। रंग बिरंगे फूलों से यह, शोभित है घर बार।। प्रथम दिवस से नवरात्र जहाँ, लगता माँ दरबार। बारी-बारी…

रुठी क्यों दुखहरणी माता- बिंदु अग्रवाल

रूठी क्यों दुखहरणी माता रूठी क्यों दुखहरणी माताकैसे मैं तुझे मानाऊँ?कैसी विकट प्रतीक्षा की हैकैसे मैं तुझे बताऊँ? न जानूँ मैं जप तप ध्यानाकैसे तुझे रिझाऊँ?मुझमें नहीं है धैर्य राम…

त्वमेका शिवा- राम किशोर पाठक

त्वमेका शिवा – स्त्रोत सदा शक्ति आलंब भक्तान माता, न जानामि योगं जपं नैव ज्ञाता।सदा कल्पनाशील तुभ्यम् भजेहं, नमो दिव्य रूपं नमो सर्व त्राता।। त्वमेका शिवा आदि रूपा अनूपा, त्वमेका…