Category: Bhakti

For the attainment of God in the world, for the welfare of the person, one has to do spiritual practice for salvation. For this, Bhakti is the best. Therefore, devotion to God and having prayer and meditation is called Bhakti.

क्या बदलाव लायेगा नया साल-विवेक कुमारक्या बदलाव लायेगा नया साल-विवेक कुमार

0 Comments 12:07 pm

बीते को भुलाना, नए को अपनाना, जो खोया उसका रोना, पाए पर इतराना, अच्छाई से दोस्ती, बुराई से घबड़ाना, खट्टी[...]

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Ram Kishore Pathak

कोहरा – उल्लाला छंद गीत – राम किशोर पाठककोहरा – उल्लाला छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 11:40 pm

कोहरा – उल्लाला छंद गीत – राम किशोर पाठक सभी लोग हैं काँपते, सर्दी सबको खल रही। फैल गया है[...]

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Ram Kishore Pathak

रघुवर नमन- राम किशोर पाठक रघुवर नमन- राम किशोर पाठक 

0 Comments 2:29 pm

करता रघुवर नमन तुम्हारा। चंचल चितवन चमन हमारा।। कैसे सुलभ सहज सब पाऊँ। कैसे निषाद चरण पखारा।। करता रजकण शिला[...]

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Ram Kishore Pathak

बम शिव कहके- मधुमति छंद वर्णिक – राम किशोर पाठकबम शिव कहके- मधुमति छंद वर्णिक – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:54 pm

बम शिव कहके- मधुमति छंद वर्णिक – राम किशोर पाठक १११-१११-२ उपवन महके। खर खग चहके।। तन-मन बहके। बम शिव[...]

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Ram Kishore Pathak

गणेश- कहमुकरी – राम किशोर पाठकगणेश- कहमुकरी – राम किशोर पाठक

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गणेश- कहमुकरी पेट बड़ा हर-पल दिखलाता। लड्डू झट-पट चट कर जाता।। मोहित करता सुनहरा केश। क्या सखि? साजन! न सखी![...]

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S K punam

रूपघनाक्षरी – शृंगार – एस.के.पूनमरूपघनाक्षरी – शृंगार – एस.के.पूनम

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ऊँ कृष्णाय नमः विधा:-रूपघनाक्षरी। विषय:-शृंगार। उठती हैं सागर में, तरंगें हजारों बार, सिन्धु करे जल राशि,से शृंगार बार-बार। केवट है[...]

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Ram Kishore Pathak

शरण गहूँ दिन-रात – राम किशोर पाठकशरण गहूँ दिन-रात – राम किशोर पाठक

0 Comments 1:41 pm

ध्यान लगा मैं कर सकूँ, रचना की बरसात। भजन करूँ नित मातु की, शरण गहूँ दिन-रात।। शब्द पुष्प के हार[...]

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Jainendra

प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 10:36 pm

श्याम वंशीवाला सिर पे मुकुट मोर, गोपियों के चित्तचोर, होंठ लाले-लाल किये, खड़ा बंसी वाला है। कहते हैं ग्वाल-बाल, मित्र[...]

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Ram Kishore Pathak

फिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठकफिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठक

0 Comments 4:06 pm

कहती अम्मा मुझको लल्ला। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।। कान्हा थें कितना ही नटखट। माखन मिसरी खाते चटपट।। घूमा[...]

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Ram Kishore Pathak

आओ हे बनवारी- राम किशोर पाठक आओ हे बनवारी- राम किशोर पाठक 

0 Comments 5:47 pm

आओ हे बनवारी- गीत हरने कष्ट हमारी। आओ हे बनवारी।। मेरा धर्म बचाना। करना नहीं बहाना।। आस रखी दुखियारी। आओ[...]

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