कौन रुका है? – गिरीन्द्र मोहन झा

कौन रुका है? प्रश्न है कौन रुका है? सूर्य, मंदाकिनी का चक्कर लगाते, अवनि, सूर्य का चक्कर लगाती, मयंक, पृथ्वी का चक्कर लगाता। फिर बोलो कौन रुका है? पौधे निरन्तर…

दहेज -डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

माँ के भला कोख़ में क्यों मरती बेटियाँ, जन्म लेती नमक क्यों हैं चखती बेटियाँ। समाज के दरिंदों तुम आवाज़ मेरी सुन, खुद मरती रहीं तुमको हैं क्यों जनती बेटियाँ।…

माँ सम्पूर्ण ब्रह्म -स्नेहलता द्विवेदी “आर्या

माँ! शब्द नही ब्रह्म! संतति का सर्वस्व! निर्मल मोहक सौंदर्य! माँ! अद्भुत आनंद! धरा का स्वर्ग। सृष्टि में अतुल्य! माँ! सहती पीड़ा अनंत! मुस्कराते हुये, संतति के लिए! साहस अदम्य!…

मित्रवत व्यवहार – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

रूप घनाक्षरी छंद आपसी बढ़ाए प्रीत, लिखिए नवल गीत, अपने पराए हेतु, दिल में भरा हो प्यार। कोई नहीं बड़ा-छोटा, नहीं कोई खरा-खोटा, शत्रुता को भुलाकर, सबको बनाएंँ यार। छोटों…

धरती का मान बढ़ाएंगे – देव कांत मिश्र ‘दिव्य

धरती का मान बढ़ाएंगे – विधा: गीत(१६-१६) जन्म लिए हैं दिव्य भूमि पर धरती का मान बढ़ाएँगे। रंग-बिरंगे फूल खिलाकर, बागों को खूब सजाएँगे।। धरा हमारी मातृ तुल्य हैं, सच्ची…

सबको गले लगाएँ हम – राम किशोर पाठक

विधा: गीतिका भटके को राह दिखाएँ हम, सबको गले लगाएँ हम। कलुष भाव के घोर तिमिर में, प्रेम-पुंज फैलाएँ हम।। दुष्कर्मों का गंध भरा है, कर्म-पुष्प विकसाएँ हम। जो मानवता…

धरा विचार – मुक्तामणि छंद – राम किशोर पाठक

धरा विचार – मुक्तामणि छंद धरती कहती प्रेम से, सुनें प्यार से बातें। भूल अगर करते नहीं, आज नहीं पछताते।। भीषण गर्मी पड़ रही, काट रहे तरु प्यारे। पीने के…