काश!सबके किस्मत मे होता- अवनीश कुमार

सबके किस्मत मे नही होता दादी की बनाई आचार चट करना और फिर मुस्कुराकर उनके पीछे छिप जाना सबके किस्मत मे नही होता दादू के कंधे पर बैठकर कान्हा बन…

नव वर्ष – डॉ स्नेहलता द्विवेदी “आर्या”

  नव संकल्प ले नव विहान का, नूतन अभिनन्दन कर लो। जो विकृति हो अपसंस्कृति हो, उसका चलो शमन कर लो। नव संकल्प ले नव विहान का, नूतन अभिनन्दन कर…

खट्टी-मीठी यादें – रामकिशोर पाठक

  बीत रहा यह साल है, देकर खट्टी-मीठी यादों को। जीवन भर हम याद करेंगे, गुजरे कुछ संवादों को।। कुछ लाएगी मुस्कान होंठ पर, कुछ ऑंखों में मोती। कुछ से…

छठ पर्व की महिमा – अमरनाथ त्रिवेदी

छठ पर्व की महिमा अति न्यारी, चार दिनों तक लगती है प्यारी। जीवन सकल धन्य कर देती। यह सर्व दुर्गुणों को हर लेती। चारों ओर उत्सव और बधाई, लगता जीवन…