करना है, करते ही जाना है, बढ़ना है, बढ़ते ही जाना है, जब है सूर्य का तुममें वास, कोई अंधेरा क्या बिगाड़ेगा, उर में हो जोश का आकाश, शत्रु भी…
Category: Bhawna
गोरैया – मनु कुमारी
रोज सबेरे चूं -चूं करके हम सबके आंगन आती है। दुनिया के सोए मानव का हृदय स्पंद जगाती है।। एक एक तिनका को चुनकर मेहनत से घर वो बनाती है।…
काश!सबके किस्मत मे होता- अवनीश कुमार
सबके किस्मत मे नही होता दादी की बनाई आचार चट करना और फिर मुस्कुराकर उनके पीछे छिप जाना सबके किस्मत मे नही होता दादू के कंधे पर बैठकर कान्हा बन…
अंगेठी सा तू जल जरा – संजय कुमार गुप्ता
अंगेठी में ना होती लौ ,ना होती कोई लपेटे । पर तमस समेटे रहते हैं ये काले जलते कोयले। यूं ही साए में जीते हैं पर तम- तिमिर-तृष्णा , सब…
नव वर्ष – डॉ स्नेहलता द्विवेदी “आर्या”
नव संकल्प ले नव विहान का, नूतन अभिनन्दन कर लो। जो विकृति हो अपसंस्कृति हो, उसका चलो शमन कर लो। नव संकल्प ले नव विहान का, नूतन अभिनन्दन कर…
नव वर्ष – संजय कुमार
आओ हम नव वर्ष मना लें नूतन-नूतन हर्ष मना लें बीत गया जो वर्ष पुराना श्रद्धा सुमन उसको अर्पित कर उष्ण आँसुओं का अर्पण कर बीत गया जो वर्ष पुराना…
खट्टी-मीठी यादें – रामकिशोर पाठक
बीत रहा यह साल है, देकर खट्टी-मीठी यादों को। जीवन भर हम याद करेंगे, गुजरे कुछ संवादों को।। कुछ लाएगी मुस्कान होंठ पर, कुछ ऑंखों में मोती। कुछ से…
बीता वर्ष २०२४ – अमरनाथ त्रिवेदी
जो बीत रहा है समय अभी, वह लौटकर कभी न आएगा। सदियों वर्ष यों ही बीत गए, अब २०२४ भी बीत जाएगा। समय नहीं कभी बैठा रहता, यों ही…
मेरा भारत महान -नीतू शाही
मेरा भारत महान, तेरी जय हो तेरी धरती पर, मैने जन्म लिया हो तेरी नदियों का जल, मेरी प्यास बुझाता हैं तेरे पहाड़ों की छाया मेरे मन को शांति देती…
छठ पर्व की महिमा – अमरनाथ त्रिवेदी
छठ पर्व की महिमा अति न्यारी, चार दिनों तक लगती है प्यारी। जीवन सकल धन्य कर देती। यह सर्व दुर्गुणों को हर लेती। चारों ओर उत्सव और बधाई, लगता जीवन…