बैलगाड़ी हाँकते – एस.के.पूनम

विधा:-मनहरण घनाक्षरी कड़कड़ाती ठंड है, प्रकाश की तलाश है, सूरज की प्रतीक्षा में,प्राची दिशा झाँकते। पक्षियों का कलरव, शबनम चमकती, कोहरे का पहरा है,बैठ आग सेकते। अन्नादाता खेत पर, फलियां…

प्रेम उपहार-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

मनहरण घनाक्षरी छंद सबकी बनाए भाल चौबीस का नया साल, साथियों के लिए लाए, खुशियां अपार है। आप सभी छोटे बड़े रहते हैं साथ खड़े, आपकी दुआएं हमें, दिल से…

पढ़ें -लिखे को मुर्ख बनाता है – नीतू रानी

विषय -अनपढ हुकूमत करता है। शीर्षक – पढ़ें -लिखे को मुर्ख बनाता है। अनपढ़ हुकूमत करता है, पढ़े-लिखे को बेवकूफ बनाता है । सोचता है हम हैं बहुत पढ़े उसी…