वृक्षों की पत्ती जब धरा पर गिरती है, जीवन की धारा को यूँ कहां छोड़ती है। सूर्य की प्रभा से चमकती-दमकती है, बन ठन कर मानों वह इठलाती है। वायु…
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Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.
काल-खण्ड – एस.के.पूनम
संसार में समय एक सा रहता नहीं है सदा, आज जहाँ उत्सव- काल है कल वहाँ शोकाकुल होगा, आज जहाँ सद्भावनाओं का कीर्ति स्तम्भ है, कल वहाँ अपयशों का बाजार…
रिश्ते – धीरज कुमार
हर किसी से सीधा रिश्ता किसी का जुड़ा है नही। हर किसी के लिए सीधे जुड़ कर रिश्ते बनाते हैं नहीं । कुछ रिश्ते कब ,कैसे और कहां बनेंगे ये…
मेरी दिवाली – संजय कुमार
दूर खड़ा मुस्कान लिए वह फुलझड़ियों की दुकानों पे छोटी सी अंजुलि में उसको कुछ सिक्के गिनते देखा था गहरी उसकी आँख में मैने खुशियाँ मरते देखा था एक गरीब…
दीप जले – अशोक कुमार
दीप जले दीप जले, घर आंगन दीप जले| चारों तरफ खुशियां है छाई, दीपों का त्योहार आई|| वीर सपूतों के याद मे, घर-घर दीप जलाएं| स्कूल हो या घर हो,…
आओ मन का अंधकार मिटाए – संजय कुमार
आओ मन का अंधकार मिटाए, प्रेम भाव का एक दीप जलाएं। कद्र करें सबकी भावनाओं का, वैर और आपसी रंजिश मिटाए। आओ मन का अंधकार मिटाए, प्रेम भाव का एक…
लावणी छंद – सुधीर कुमार
मात्रा — ३० यति – १६,१४ —————– मन के अंदर दीप जला लो , आओ आज दिवाली में । खुशियों से मन को महका लो , आओ आज दिवाली में…
दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य
आत्म ज्योति ज्ञानाज्य से, करें दीप्तिमय आज। लेकर नव संकल्प से, रखिए सुखी समाज।। भाव हमेशा उच्च रख, करिए प्रभु से प्यार। अमित तोष आनंद की, खुशियाँ मिले अपार।। अवलि…
जगमग जोत जले – मनु कुमारी
जगमग जोत जले। सत्य का दीप ,प्रेम का बाती, हर घट जोत जले। ईर्ष्या द्वेश का भाव ना आए, मैत्री भाव पले। असत्य जगत का मोह दूर हो, सत्य की…
आँगन के फूल – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
जग के आंखों के हैं तारे ये आँगन के फूल हमारे, इनके आगे फीका लगता है नील गगन के चांद सितारे। बच्चे होते हैं तितली जैसे इनकी शोभा होती न्यारी,…