मैं प्रकृति हूँ- संदीप कुमार

मैं प्रकृति हूँ मैं प्रकृति हूँ! इंसान मैं तुझे क्या नहीं देती हूँ सबकुछ समर्पित करती हूँ तेरे लिए फिर भी तुम मेरे संग बुरा बर्ताव करते हो क्यों आखिर…

हौसलों की उड़ान अभी बाकी है-नूतन कुमारी

हौसलों की उड़ान अभी बाकी है सारी बाधाएँ को पार कर, सफलता की परचम मैं लहराऊँ, जो नहीं हुआ सदियों तक, चाहत है कुछ ऐसा कर जाऊँ, मिलना वो मुकाम…

कैसे-प्रभात रमण

कैसे  माँ भारती के दिव्य रूप को मैं दिवास्वप्न समझूँ कैसे ? इसके परम पूण्य प्रताप को मैं भला भूलूँ कैसे ? वीरों के शोणित धार को कैसे मैं नीर…

मैं शिक्षक हूँ-स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

मैं शिक्षक हूँ मैनें तो सूरज चाँद रचा, इस जीवन का सम्मान रचा, नव अंकुर नव कोपलों में, रच बस कर जीवन मान रचा। खुद जलकर तपकर सींच रहा, खुद…

निर्वाण-मनोज कुमार दुबे

निर्वाण हे मातृभूमि वसुधा धरा वसुंधरा। अर्पित है तेरे चरण रज लोहित मेरा।। तू विभवशालिनी विश्वपालिनी दुःखहर्त्री है। भय निवारिणी शांतिकारिणी सुखकर्त्री है।। निर्मल तेरा नीर अमृत सा उत्तम। शीतल…

इस माटी की शान बढ़ाएँ-दिलीप कुमार गुप्ता

 इस माटी की शान बढाएँ  जलाकर स्वदेशी सुगंधित गुलाल लगाएँ पतंग उड़ाकर स्वदेशी स्वाभिमान का तिरंगा फहराएँ आओ! स्वदेशी अपनाएँ इस माटी की शान बढाएँ । लाखों हाथों को काम…