विश्व वन्यजीव दिवस मनाईए, सभी वन्यजीवों को मारने से बचाइए। वन्यजीव के लिए लगाइए पेड़, रहेंगे उसमें बंदर,हाथी ,चीता और शेर। वन्यजीवों की सुरक्षा का करो प्रबंध, बनाओ उसके साथ…
Category: प्रकृति
बसंत का आगमन -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
खेतों में हरियाली शोभें सरसों-अलसी बलखाती है। ऋतुराज के स्वागत में कोयल गीत खुशी से गाती है। नव पल्लव पा मधुबन हंँसता कलियांँ खिलती हैं धीरे, हरे दूब पर बिछें…
बसंत की बहार- मुन्नी कुमारी
बसंत की बहार है, वर्षा की फुहार है। रंगों का त्योहार है, आया खुशियों का बौछार है। सूरज की किरणे सारी, कोयल की कूक प्यारी। भँवरे की राग न्यारी, गीतो…
राष्ट्रीय पक्षी दिवस – मनहरण घनाक्षरी – राम किशोर पाठक
राष्ट्रीय पक्षी दिवस – मनहरण घनाक्षरी – राम किशोर पाठक आया यह दिन खास, करना है अहसास, जनवरी पाँच आज, समझ बनाइए। कौआ चील गिद्ध मोर, पक्षियों के भाए शोर,…
अलाव-राम किशोर पाठक प्रधान शिक्षक
कुहासा है घना देखो, जलाने आग अब आओ। रहे हो कांँपते अबतक, जरा अब तापकर जाओ।। पता पथ का नहीं चलता, उजाला मिल न पाता है। चलें अब राह हम…
उत्पाती वर्षा – राम किशोर पाठक
उत्पाती वर्षा वर्षा रानी क्रुद्ध हो, करती है उत्पात।इंद्र साथ भी दे रहे, कर भीषण वज्रपात।। बाहर खतरा है घना, छिपकर रहते लोग।वही लाचार विवश हो, करते कुछ उद्योग।। हान…
नन्हा पौधा
नन्हा पौधा दादा जी ने बीज लगाया,दादी ने पानी डलवाया।चुन्नू-मुन्नू दौड़े आए,साथ में खाद भी लेकर आए। सात दिनों के बाद बीज ने,नन्हीं-नन्हीं पलकें खोली।बड़ी सलोनी है यह दुनियाँ,छोटी सी…
प्राकृतिक आपदा -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
रूप घनाक्षरी छंद में कभी-कहीं बाढ़ आए, कभी तो सुखाड़ आए, सड़कें मकान सारे, हो जाते हैं जमींदोज़। पहाड़ चटक रहे, बादल भी फट रहे, हर साल कोई नई, आफत…