आजादी – महाचण्डिका छंद गीत – राम किशोर पाठक

आजादी – महाचण्डिका छंद गीत इसका अपना अर्थ है, सबको यह समझाइए। आजादी के मूल्य को, जरा समझने आइए।। सहते अत्याचार थे, ऐसा अपना देश था। जानवरों सा हाल था,…

यही रात अंतिम, यही रात भारी- नीतू रानी

यही रात अंतिम, यही रात भारी विषय -पक्षियों की गोष्ठी। बकरी, मुर्गी,अंडा , मछली और कबूतर ये सभी हैं मीत, रखें आज रक्षाबंधन दिन गोष्ठी और गा रहे हैं गीत।…

कीमत चुकानी होगी – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

कीमत चुकानी होगी मनहरण घनाक्षरी छंद में बिजली के कटने से, बढ़ जाती परेशानी, ए सी में जो रहने की, हो जाती आदत है। घटाएंँ बरसने से, मौसम बदल जाता,…

बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद- राम किशोर पाठक

बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद पाँव में पाजेब मनहर बाँध अपने। नाचते हैं श्याम बनकर बाल सपने।। देखकर नंगे कदम के दाँव प्यारे। झूमता है मन मयूरा भी हमारे।।…

कर्म – गिरींद्र मोहन झा

कर्म जो किया जाता है, वही होता है ‘कर्म’, जो करने योग्य हो, वही है कर्त्तव्य-कर्म, कहते हैं, कर्म के होते हैं तीन प्रकार, प्रारब्ध, संचित और क्रियमाण कर्म, जो…

एक पेड़ मांँ के नाम – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

एक पेड़ मांँ के नाम मनहरण घनाक्षरी छंद में बहुत खुशी की बात, आ गई है बरसात, पेड़-पौधे लगाकर, धरा को सजाइए। जहांँ हो जगह खाली, खेत-भूमि नमी वाली, एक…

यह धरती है प्रभु की प्यारी – अमरनाथ त्रिवेदी

यह धरती है प्रभु की प्यारी हम बच्चे अपने धुन में गाएँ, प्रभु चरणों में शीश नवाएँ । जिनका है धरती और अम्बर , उनके प्रति हम भक्ति बढ़ाएँ ।…