Category: sandeshparak

Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.

फसलों का त्योहार है खिचड़ी-एम० एस० हुसैन कैमूरी फसलों का त्योहार है खिचड़ी-एम० एस० हुसैन कैमूरी 

0 Comments 8:06 pm

फसलों का त्योहार है खिचड़ी  प्रकृति का उपहार है खिचड़ी  देखिए फसलों की पैदावार बढ़ाकर  लाई खुशियों की बौछार है[...]

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Manu Raman Chetna

मकरसंक्रांति आई है – मनु कुमारीमकरसंक्रांति आई है – मनु कुमारी

0 Comments 7:58 pm

मकर संक्रांति आई है संग में खुशियां लाई है। तिल के लड्डू की खुश्बू ने घर में सुगंध फैलाई है।।[...]

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Manu Raman Chetna

प्रेम की पतंग-मनु कुमारीप्रेम की पतंग-मनु कुमारी

0 Comments 7:00 pm

मकरसंक्रांति आओ, मिलकर मनाते हैं,  प्रेम की पतंग पिया हम ,साथ में उड़ाते हैं।। रंग बिरंगी फूलों से हम आशियां[...]

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Ram Kishore Pathak

पर-हित चिंतन-राम किशोर पाठकपर-हित चिंतन-राम किशोर पाठक

0 Comments 1:32 pm

पर-हित चिंतन- दोहा छंद गीत पर-हित चिंतन में सदा, रहते हैं जो लीन। ईश्वर की उनपर कृपा, रहती नित्य नवीन।।[...]

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Manu Raman Chetna

मिथिला हाट – मनु कुमारीमिथिला हाट – मनु कुमारी

0 Comments 10:33 am

सीता माय के पावन जन्मभूमि , मधुबनी झंझारपुर । ताहि में बनल अछि  मिथिला हाट । गेलों घुमय सपरिवार। दुई[...]

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Manu Raman Chetna

लोहड़ी पर्व -मनु कुमारीलोहड़ी पर्व -मनु कुमारी

0 Comments 3:26 pm

खुशियां लेकर लोहड़ी आई। सबके मन उमंग है छाई। सुख समृद्धि संग लेकर आती। सबको प्रेम से गले लगाती। पुराने[...]

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RAMPAL SINGH ANJAN

मकर संक्रांति-रामपाल प्रसाद सिंह अनजान मकर संक्रांति-रामपाल प्रसाद सिंह अनजान 

0 Comments 1:41 pm

भोर आज हो रहा। हर्ष राज हो रहा।। आर-पार शोर है। लोहड़ी हिलोर है।। आज सूर्य आ गया। लाल सब्र[...]

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Ram Kishore Pathak

मकर संक्रांति-राम किशोर पाठकमकर संक्रांति-राम किशोर पाठक

0 Comments 1:30 pm

पुण्य के पल का समझकर राज, पर्व हम अपना मनाएँ। जाह्नवी जल में नहाकर आज, पर्व हम अपना मनाएँ।। हर्ष[...]

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मकर संक्रांति-बैकुंठ बिहारीमकर संक्रांति-बैकुंठ बिहारी

0 Comments 1:26 pm

आया मकर संक्रांति का पर्व, जो बनाता संतुलन प्रकृति के साथ, संतुलन सूर्योपासना के साथ, संतुलन मानव जीवन के साथ।[...]

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RAMPAL SINGH ANJAN

कहर-रामपाल प्रसाद सिंह “अनजान”कहर-रामपाल प्रसाद सिंह “अनजान”

0 Comments 1:17 pm

गजब शीत काया। बदन काट खाया।। अब कहाॅं सवेरा?। अरुण का बसेरा।। कनकनी चढ़ी है। थरथरी बढ़ी है।। सुबह शाम[...]

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