बचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद – राम किशोर पाठक

बचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद हरपल सबसे मिलकर कहते। हम-सब अपने बनकर रहते।। बरबस कुछ भी कब हम करते। सुरभित तन से मन सब हरते।। बचपन अपना अभिनय करता। बरबस…

हमें तरु-मित्र बनना होगा- राम किशोर पाठक

हमें तरु-मित्र बनना होगा नया सोपान गढ़ना होगा। हमें तरु-मित्र बनना होगा।। दादा के रोपें पेड़ों से, हमने है कितने काम लिए। ठंडी छाँव संग फल खाकर, झूला भी हम-सब…

बिना विचारे नहीं करें – अमरनाथ त्रिवेदी

बिना विचारे नहीं करें बिना   विचारे  नहीं  करें  जीवन  में कोई काम , ऐसा यदि नहीं  किया   तो  होगा  बुरा  अंजाम । देख सुनकर सोच बढ़ाएँ , विचारों में अव्वल…

सुविधा और स्वास्थ्य- कुण्डल छंद- राम किशोर पाठक

सुविधा और स्वास्थ्य- कुण्डल छंद सुविधाएंँ सभी आज, सबको हैं प्यारे। मशीन बन गए लोग, एहसास मारे।। करते सभी आराम, श्रम सभी नकारे। स्वास्थ्य का बिगड़ा हाल, सब हैं बेचारे।।…

भौतिक सुविधा और स्वास्थ्य- अमरनाथ त्रिवेदी

भौतिक सुविधा और स्वास्थ्य आज  होड़ लगी है  भौतिक  सुख सुविधा की , स्वास्थ्य के लिए कुछ दोस्त बने कुछ दुश्मन हैं ।   बुद्धि ही असल इसमें सही ज्ञान…

सुख सुविधाओं के चक्कर में- सरसी छंद गीत- राम किशोर पाठक

सुख सुविधाओं के चक्कर में- सरसी छंद गीत अपने हाथों से जीवन में, घोल रहा विष जान। सुख सुविधाओं के चक्कर में, आज पड़ा इंसान।। श्रम से बचता फिरता मानव,…

गुरुवर वाले प्रेम से – अवतार छंद गीतिका- राम किशोर पाठक

गुरुवर वाले प्रेम से – अवतार छंद गीतिका झूम रहे सब संग में, कुछ आज कीजिए। गुरुवर वाले प्रेम से, भर हृदय लीजिए।। बच्चों का भी मन लगे, आ सके…

घट-घट वासी शिव संन्यासी – सरसी छंद गीत – राम किशोर पाठक

घट-घट वासी शिव संन्यासी – सरसी छंद गीत बैठे हैं भस्म लगा कैलाशी, करते बेड़ा पार। घट-घट वासी शिव संन्यासी, महिमा अपरम्पार।। महाकाल शंकर विश्वंभर, हर लेते हैं शोक। शरणागत…

समय – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान ‘

समय/काल दोहे समय नहीं है छोड़ता,चाहे हो बलवान। युग आए ठहरे नहीं,थोड़े दिन की शान।। समय परख सज्जन चले,दुर्जन खोए मान। पार्थ लिए श्री कृष्ण से,दुर्योधन हतवान।। ठहरा जो सड़ता…