Category: sandeshparak

Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.

Nitu Rani

शिक्षा और समाज – नीतू रानीशिक्षा और समाज – नीतू रानी

0 Comments 9:43 pm

शिक्षा और समाज बिना शिक्षा के मिटै न अंधकार। शिक्षा से समाज का होता अधिक विकास, पढ़-लिखकर शिक्षित होंगे हमारे[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
S K punam

रूपघनाक्षरी – शृंगार – एस.के.पूनमरूपघनाक्षरी – शृंगार – एस.के.पूनम

0 Comments 9:38 pm

ऊँ कृष्णाय नमः विधा:-रूपघनाक्षरी। विषय:-शृंगार। उठती हैं सागर में, तरंगें हजारों बार, सिन्धु करे जल राशि,से शृंगार बार-बार। केवट है[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

जमाने में – गजल – राम किशोर पाठकजमाने में – गजल – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:52 pm

जमाने में – गजल – राम किशोर पाठक कौन है जो कहे जमाने में। मौन सारे लगे बचाने में।। आज[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

जुआ-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ जुआ-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

0 Comments 9:39 pm

छल सुयोधन संग लेकर,चल पड़ा दरबार में। माॅंगना है जो नियोजित,शेष अगली बार में।। पास राजा के पहुॅंचकर,चाल वैसी ही[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

ठंड का प्रभाव-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ठंड का प्रभाव-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 1:32 pm

तापमान गिरने से मौसम बदलने से *धीरे-धीरे ठंडक का, बढ़ता प्रभाव है।* पंछियाँ तो घोसले में- रहतीं दुबककर, *पशु छिप[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

मैं राष्ट्र धर्म को अपनाया – राम किशोर पाठक मैं राष्ट्र धर्म को अपनाया – राम किशोर पाठक 

0 Comments 1:21 pm

मैं बहती बन जाऊँ सरिता  मैं जीवन में लाऊँ ललिता  मैं झुंड यहाँ देखूँ कितने मैं ढूँढ रहा खुद के[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

आसरा पास बैठी है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ आसरा पास बैठी है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

0 Comments 1:31 pm

  खींचती मर्म की रेखा।। जन्म लेते जिसे देखा। आज माॅं खास बैठी है। आसरा पास बैठी है।। दर्द होने[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

हमें नहीं डरना-राम किशोर पाठकहमें नहीं डरना-राम किशोर पाठक

0 Comments 1:35 pm

कभी नहीं रुकते, आगे है बढ़ना। सहज भाव कहते, हमें नहीं डरना।। आती है बाधा, अक्सर राहों में। ताकत कर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Girindra Mohan Jha

बचपन-गिरीन्द्र मोहन झाबचपन-गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 11:09 pm

खेलना, मस्ती करना, बड़े-बड़े ख्वाब देखना, पढ़ाई करना, जिज्ञासु प्रवृत्ति का हो जाना, बड़े-बड़े सपने देखना, पर धरातल से सदा[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें