भक्त की आशा यही है, भक्त को माँ तार दे। भाव की थाली लिए मैं, द्वार पर माँ शारदे।। पुष्प श्रद्धा भक्ति का मैं, ले शरण में आ गया। कर…
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
स्वर की देवी सरस्वती-नीतू रानी
कमल आसन पर बैसल छथि, स्वर की देवी सरस्वती। माँ हँस वाहिनी ज्ञान दायिनी, विद्या दायिनी सरस्वती। कमल आसन पर बैसल छथि, स्वर की देवी सरस्वती। मांँ स्वेत वस्त्र धारिनी…
बिहार के शिक्षक -ब्यूटी कुमारी
बिहार के शिक्षक नित नई ऊर्जा के साथ विद्यालय आते बिहार के शिक्षक। बच्चों को पढ़ाते मूल्यों का पाठ बिहार के शिक्षक। कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासित बच्चों से रखते भावनात्मक लगाव बिहार…
बिहार का शिक्षक-मनु कुमारी
टूटी बेंचों, टपकती छतों के बीच वह शिक्षक खड़ा है— हाथ में केवल चाक नहीं, हाथ में बच्चों का भविष्य है। सीमित साधन, अनगिनत चुनौतियाँ, फिर भी हार नहीं मानता—…
आओ स्थापना दिवस मनाएँ-मृत्युंजय कुमार
देखो, सातवाँ स्थापना दिवस है आया, टीचर्स ऑफ बिहार परिवार में खुशियों का उजास छाया। सात वर्षों का यह सफर रहा सुहाना, शिक्षा के क्षेत्र में रचा गया अनगिनत कारनामा।…
अतुल है राष्ट्र की महिमा-एस.के.पूनम
जहाँ परिवेश है सुंदर, वही महिमा बढ़ाते हैं। पुराणों और वेदों से विद्या की लौ जलाते हैं। हमारा देश है प्यारा, धरा पर मान पाते हैं। अतुल है राष्ट्र की…
आत्मविश्वास से भरे डगर में -अमरनाथ त्रिवेदी
आत्मविश्वास से भरे डगर में , न मन, प्राण , वचन से पीछे जाना । हम सबके दिल के स्नेह हो प्यारे , भविष्य में अपनी पहचान बनाना । मन हर्षित दिल अभिलषित है मेरा , तू अभी से सँभलते जाओ । स्नेहसिक्त करूँ आज तुझे मैं…
टीचर्स ऑफ बिहार : नवचेतना का उद्घोष-मनु कुमारी
जब शिक्षा को मिला नव संबल, जब शिक्षक को पहचान मिली, बीस जनवरी का वह पावन दिन, नव इतिहास की आधारशिला मिली। विचार बने दीप, श्रम बनी लौ, प्रतिभा को…
टीचर्स ऑफ बिहार हमारा-एम० एस० हुसैन कैमूरी
आज है , टीओबी का स्थापना दिवस आईए हम सब मिलकर इसको मनाएं इसी से होती है हमारी रचनाएं प्रकाशित जन – जन तक इस बात को पहुंचाएं कौन करेगा…
ऋतुराज बसंत- रत्ना प्रिया
प्रकृति यौवन का रूप धार, करती नित्य-नूतन श्रृंगार, सौंदर्य शिखाओं में अनंत, चहुँ ओर खिला यह दिग-दिगंत, कण-कण में उल्लास छा गया । ऋतुराज बसंत है आ गया । पीत-वर्णी…