प्रणाम सर! — खुश रहो बच्चा, जीवन में तुम आगे बढ़ना। पढ़ाई करो अच्छा-अच्छा, ज्ञान का दीपक सदा जलाना। काम[...]
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
मोह का बंधन – मनु कुमारीमोह का बंधन – मनु कुमारी
बहुत प्रबल होता है सखे ये, मोह का नाज़ुक बंधन। इसमें बंधे चले जाते सब , धनी हो चाहे निर्धन।।[...]
सेवाभावी की अभिलाषा – उमेश कुमार सिन्हा सेवाभावी की अभिलाषा – उमेश कुमार सिन्हा
नहीं चाहूँ स्वर्णिम वैभव का मुझ पर राजतिलक हो, नहीं चाहूँ यश का सूरज मेरे ही आँगन उदित हो। नहीं[...]
बचपन की बारात – उमेश कुमार सिन्हा “निर्देशक”बचपन की बारात – उमेश कुमार सिन्हा “निर्देशक”
एक-एक रुपया जोड़-जोड़कर गुल्लक अपनी भर लाई, दादी के घर बड़े जतन से मैंने एक गुड्डा बनवाई। नानी के घर[...]
आध्यात्मिक दुखों का कोई सहारा नहीं – कार्तिक कुमार आध्यात्मिक दुखों का कोई सहारा नहीं – कार्तिक कुमार
आध्यात्मिक दुखों का कोई सहारा नहीं – कार्तिक कुमार मन के भीतर उठता दुख, बाहर इसका उपचार नहीं। आध्यात्मिक पीड़ा[...]
मेरा प्यारा खिलौना – कार्तिक कुमार मेरा प्यारा खिलौना – कार्तिक कुमार
मेरा प्यारा खिलौना – कार्तिक कुमार मेरा प्यारा खिलौना है, सबसे सुंदर, न्यारा है। लाल रंग की छोटी गाड़ी, चलती[...]
मेरी गुड़िया की शादी है – कार्तिक कुमार मेरी गुड़िया की शादी है – कार्तिक कुमार
मेरी गुड़िया की शादी है – कार्तिक कुमार मेरी गुड़िया की शादी है, घर में आज खुशी ज्यादा है। गुड़िया[...]
सर्वश्रेष्ठ यह भारत अपना- चंद्रवर्त्म वर्णिक छंद गीत – राम किशोर पाठकसर्वश्रेष्ठ यह भारत अपना- चंद्रवर्त्म वर्णिक छंद गीत – राम किशोर पाठक
सर्वश्रेष्ठ यह भारत अपना- चंद्रवर्त्म वर्णिक छंद गीत – राम किशोर पाठक विश्व-बोध नित लेकर सपना। सर्वश्रेष्ठ यह भारत अपना।।[...]
मेरी माँ वसुंधरा -उमेश कुमार सिन्हामेरी माँ वसुंधरा -उमेश कुमार सिन्हा
अपने आँचल में अथाह सागर समेटे, माथे पर शीतल चाँद सजाए। अपनी गोद में समस्त सृष्टि को बसाए, ओ! कोई[...]
स्वतंत्रता का अमर प्रण -उमेश कुमार सिन्हास्वतंत्रता का अमर प्रण -उमेश कुमार सिन्हा
स्वतंत्रता-दिवस आया है, हर आँगन उल्लास समाया है। केसरिया, श्वेत, हरा तिरंगा, गर्व से नभ में लहराया है। ज्यों ही[...]
