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Ram Kishore Pathak

रुख हवाओं का बदल दूं..रुख हवाओं का बदल दूं..

0 Comments 7:36 pm

गजल२१२२-२१२२ नैन तेरे कर सजल दूँ।आज लिखकर मैं गजल दूँ।। कौन तेरा है बता दो।आज रिश्तें कर अटल दूँ।। यूँ[...]

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Ram Kishore Pathak

आप संग रहें -रामकिशोर पाठकआप संग रहें -रामकिशोर पाठक

0 Comments 5:21 pm

आप संग रहे- छंद वार्णिक २१२-११२, २२१-२१ अंग-अंग कहे, पाया निखार। आप संग रहे, भाया विचार।। भूल चूक किया, स्वीकार[...]

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आभूषण -रामपाल प्रसाद सिंहआभूषण -रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 5:18 pm

मनहरण घनाक्षरी आभूषण कंदरा गुफाओं बीच,नारी रही नर खींच, कल्पना में डूबा नर ,नारी को सजाने में। पत्थरों को घिसकर,भावना[...]

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Jainendra

आभूषण -जैनेन्द्र प्रसाद रविआभूषण -जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 5:15 pm

आभूषण मनहरण घनाक्षरी छंद सदियों से मानव को, लुभाता है चकाचौंध, नर-नारी सभी को ही, आभूषण भाता है। सभी धनवान[...]

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Jainendra

श्यामला सवारियां -जैनेंद्र प्रसाद रविश्यामला सवारियां -जैनेंद्र प्रसाद रवि

0 Comments 2:13 pm

श्यामला सांवरिया एक दिन श्यामा प्यारी, साथ में सहेली सारी, पानी भरने को गई, गोकुल नगरिया। पहले तो घबराई, फिर[...]

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ॐ कृष्णय नमः -एस के पूनमॐ कृष्णय नमः -एस के पूनम

0 Comments 2:10 pm

ॐ कृष्णाय नमः विधा:-मनहरण स्वयं भूखे रह कर, पूत का भरतीं पेट, शयन में सोचती हूँ,कहाँ से अन्न लाऊँ। श्रम[...]

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Ram Kishore Pathak

सुरभित हो संसार -रामकिशोर पाठकसुरभित हो संसार -रामकिशोर पाठक

0 Comments 1:45 pm

सुरभित हो संसार – दोहा छंद चित विकार से मुक्त हो, निर्मल रहे विचार। पावन मन निज राखिए, सुरभित हो[...]

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Jainendra

ग्रामीण परिवेश-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ग्रामीण परिवेश-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 10:58 am

सुबह सवेरे जाग,  कबूतर और काग,  धूप सेकने को बैठी, पक्षियांँ मुंडेर पर। फसलें खेतों से जब  किसानों के घर[...]

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Ram Kishore Pathak

भरकर आस है -रामकिशोर पाठकभरकर आस है -रामकिशोर पाठक

0 Comments 5:20 pm

भरकर आस है – मनहरण घनाक्षरी लाल मुख प्राची किए, मोह रही जैसे प्रिय, भाव को जगाती हिय, भरकर आस[...]

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