गजल२१२२-२१२२ नैन तेरे कर सजल दूँ।आज लिखकर मैं गजल दूँ।। कौन तेरा है बता दो।आज रिश्तें कर अटल दूँ।। यूँ[...]
Category: Uncategorized
सर्दी आईसर्दी आई
सर्दी आई । सर्दी आई, सर्दी आई ,लेकर कंबल और रजाई ।स्वेटर , कोट और शॉलों ने,सबको दी पूरी गरमाई[...]
आप संग रहें -रामकिशोर पाठकआप संग रहें -रामकिशोर पाठक
आप संग रहे- छंद वार्णिक २१२-११२, २२१-२१ अंग-अंग कहे, पाया निखार। आप संग रहे, भाया विचार।। भूल चूक किया, स्वीकार[...]
आभूषण -रामपाल प्रसाद सिंहआभूषण -रामपाल प्रसाद सिंह
मनहरण घनाक्षरी आभूषण कंदरा गुफाओं बीच,नारी रही नर खींच, कल्पना में डूबा नर ,नारी को सजाने में। पत्थरों को घिसकर,भावना[...]
आभूषण -जैनेन्द्र प्रसाद रविआभूषण -जैनेन्द्र प्रसाद रवि
आभूषण मनहरण घनाक्षरी छंद सदियों से मानव को, लुभाता है चकाचौंध, नर-नारी सभी को ही, आभूषण भाता है। सभी धनवान[...]
श्यामला सवारियां -जैनेंद्र प्रसाद रविश्यामला सवारियां -जैनेंद्र प्रसाद रवि
श्यामला सांवरिया एक दिन श्यामा प्यारी, साथ में सहेली सारी, पानी भरने को गई, गोकुल नगरिया। पहले तो घबराई, फिर[...]
ॐ कृष्णय नमः -एस के पूनमॐ कृष्णय नमः -एस के पूनम
ॐ कृष्णाय नमः विधा:-मनहरण स्वयं भूखे रह कर, पूत का भरतीं पेट, शयन में सोचती हूँ,कहाँ से अन्न लाऊँ। श्रम[...]
सुरभित हो संसार -रामकिशोर पाठकसुरभित हो संसार -रामकिशोर पाठक
सुरभित हो संसार – दोहा छंद चित विकार से मुक्त हो, निर्मल रहे विचार। पावन मन निज राखिए, सुरभित हो[...]
ग्रामीण परिवेश-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ग्रामीण परिवेश-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
सुबह सवेरे जाग, कबूतर और काग, धूप सेकने को बैठी, पक्षियांँ मुंडेर पर। फसलें खेतों से जब किसानों के घर[...]
भरकर आस है -रामकिशोर पाठकभरकर आस है -रामकिशोर पाठक
भरकर आस है – मनहरण घनाक्षरी लाल मुख प्राची किए, मोह रही जैसे प्रिय, भाव को जगाती हिय, भरकर आस[...]
