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Jainendra Prasad Ravi

हिंदी माथे की बिंदी- जैनेन्द्र प्रसाद रविहिंदी माथे की बिंदी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 7:46 am

मनहरण घनाक्षरी छंद भाग-१सुगम हमारी हिन्दी,देश के माथे की बिंदी,हिंदी से ही भारत की, होती पहचान है। संस्कृत की बेटी[...]

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शिक्षक -अजय कुमारशिक्षक -अजय कुमार

0 Comments 6:04 pm

शिक्षक माताऐं देती नव जीवन, पृथ्वी देती अन्न – जल, पिता सुरक्षा करते हैं, लेकिन सच्ची मानवता, शिक्षक जीवन में[...]

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शिक्षक हमारे ज्ञान पुंज-अमरनाथ त्रिवेदीशिक्षक हमारे ज्ञान पुंज-अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 11:21 pm

शिक्षक हमारे ज्ञान पुंज कौन कहता शिक्षकों के बिना , तकदीर हम सबकी बनेगी ? कौन कहता शान में ,[...]

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सबसे खुश कौन- गिरीन्द्र मोहन झासबसे खुश कौन- गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 11:48 am

सबसे खुश कौन? जिसकी अपनी दिनचर्या पर हो पूरा अधिकार, जो खुद में हो संतुष्ट, खुद में ही रमण करे,[...]

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जादूगर ध्यानचंदजादूगर ध्यानचंद

0 Comments 4:28 pm

रूप घनाक्षरी जादूगर ध्यानचंद संगम प्रयाग भाग्य ,खुल गया तब जब, उनतीस अगस्त को, जन्म लिया नवजात। भारत माता की[...]

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जय गणेश- द्रुत विलंबित छंद जय गणेश- द्रुत विलंबित छंद 

0 Comments 10:27 am

  जय गणेश सभी कह दीजिए। चरण नेह गजानन कीजिए।। शिव उमा सबकी वर लीजिए। भजन भक्ति सदा रस पीजिए।।[...]

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