निद्रा कभी वास्तविक कभी काल्पनिक होती है यह निद्रा। कभी प्रसन्नता कभी निराशा देती है यह निद्रा। कभी साहस कभी[...]
Category: Uncategorized
आओ उठकर – रामकिशोर पाठकआओ उठकर – रामकिशोर पाठक
आओ उठकर – बाल कविता (वासुदेव छंद) अम्मा हँसकर, बोल गयी। मन में मधुरस, घोल गयी।। उठ आओ अब, भोर[...]
शब्द साधना…रामकिशोर पाठकशब्द साधना…रामकिशोर पाठक
मरहठा माधवी छंद शब्द साधना अगर, सब्र साधना, स्वयं साधा करे।शिल्प देखिए सहज, और सीखिए, मौन बाधा हरे।।अर्थ जानिए सदा,[...]
नहीं विश्वाश होता है -रामपाल पाल प्रसाद सिंहनहीं विश्वाश होता है -रामपाल पाल प्रसाद सिंह
गीत(विधाता छंद) नहीं विश्वास होता है सनातन धर्म अभ्यागत,धरा को लहलहाया है। नहीं विश्वास होता है,कि मानव ने बनाया है।।[...]
ताका ..राम किशोर पाठकताका ..राम किशोर पाठक
ताका ५-७-५, ७-७ १.सौम्य प्रसंग धरे नव उमंग रचना संग। साधना अंग-अंग शब्द दृष्टि विहंग।। २.सपने आते कुछ कह भी[...]
मौन संगीत.. डॉ अजय कुमार “मीत”मौन संगीत.. डॉ अजय कुमार “मीत”
मौन पड़ी मन वीणा को भावों ने झंकृत कर डालाजग उठे मौन से संगीत। कोरे कागज पर लेखनी दौड़ीआड़े-तिरछे अक्षर[...]
आह्वान…विजय शंकर ठाकुरआह्वान…विजय शंकर ठाकुर
सवेरे उठकर जल्दी जाओ,लोकतंत्र का पर्व मनाओ। भैया भौजी, चाचा आओ, दादा दादी को भी लाओ।मतदाता पर्ची को लेकर,कतार में[...]
गर्व से हिंदू कहे तो..रामपाल प्रसाद सिंहगर्व से हिंदू कहे तो..रामपाल प्रसाद सिंह
सुमेरु छंद (10,9)1222 12, 22 122 गर्व से हिंदू कहे तो। घटा घनघोर नभ,छाई कहाॅं से।गई थी लौट कर,आई कहाॅं[...]
किसानों की बेचैनी..जनेंद्र प्रसाद रविकिसानों की बेचैनी..जनेंद्र प्रसाद रवि
कार्तिक है बीत रही,रबी अभी लगी नहीं,आसमां में काले घन, दिखा रहे नैन हैं। खेतों में तैयार धान, आती नहीं[...]
बाल कविता आओ मिलकर छठ करें..अवधेश कुमारबाल कविता आओ मिलकर छठ करें..अवधेश कुमार
अस्ताचल सूरज को, हम सब ही प्रणाम करें,उगते सूरज और छठ माता की पूजा, सच्चे मन से करें। संध्या अर्घ्य[...]
