ज्ञान का दीप जलाता शिक्षक,
फिर भी दुख ही पाता शिक्षक।
बच्चों को उजियारा देता,
अपने मन को समझाता शिक्षक।
सुबह-सवेरे विद्यालय आता,
कर्तव्य पथ पर बढ़ता शिक्षक।
कागज़, रजिस्टर, आँकड़ों में,
अक्सर उलझा रहता शिक्षक।
सम्मान की बातें सब करते,
पर सम्मान न पाता शिक्षक।
देश का भविष्य गढ़ने वाला,
चिंता में दिन बिताता शिक्षक।
न्याय और अधिकार की राह में,
कब तक धीरज धरता शिक्षक?
महँगाई बढ़ती जाती है,
कैसे घर को चलाता शिक्षक?
सपनों को साकार बनाकर,
खुद सपनों से दूर है शिक्षक।
फिर भी मुस्काकर बच्चों को,
जीवन-पथ दिखलाता शिक्षक।
शिक्षा की अलख जगाने वाला,
राष्ट्र का भाग्य-विधाता शिक्षक।
उसके श्रम का मान बढ़ाओ,
यही संदेश सुनाता शिक्षक।
कार्तिक कुमार
मध्य विद्यालय कटरमाला
गोरौल वैशाली 7004318121

