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S K punam

सृष्टि देते उपहार – एस.के.पूनमसृष्टि देते उपहार – एस.के.पूनम

0 Comments 2:55 pm

दरिया में जल मिले, सागर में नदियाँ भी, धरती आकाश मिल सृष्टि देते उपहार। कहीं-कहीं छाँह धूप, चुभते दिलों में[...]

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S K punam

करती हूँ बंदगी – एस.के.पूनमकरती हूँ बंदगी – एस.के.पूनम

0 Comments 8:37 pm

🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-मनहरण (करती हूँ बंदगी) तरसती है निगाहें, भरती हैं नित्य आहें, भूखे पेट तड़पती,मजबूर जिन्दगी। भाग्य से निवाला[...]

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M S HUSSAIN

गर्मी आई गर्मी आई – एम० एस० हुसैन “कैमूरी”गर्मी आई गर्मी आई – एम० एस० हुसैन “कैमूरी”

0 Comments 4:18 pm

देखो गर्मी आई गर्मी आई साथ में वो गर्म हवाएं लाई बाहर न निकलो बेमतलब घर में सुरक्षित रहो रे[...]

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Manoj

जय होगी- मनोज कुमार दुबेजय होगी- मनोज कुमार दुबे

0 Comments 6:58 pm

आज नही तो कल तुम्हारी ही जय होगी भाग्य नही केवल मेहनत से ही तय होगी अंधकार का नाश प्रकाश[...]

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Suresh kumar gaurav

भारत विविधताओं में भी एकता का प्रतीक’-सुरेश कुमार गौरवभारत विविधताओं में भी एकता का प्रतीक’-सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 12:14 pm

भारतीय संस्कृति का सदा बजता रहा है, विश्व में डंका, भारतीय जनमानस में क्या रहनी चाहिए कोई भी शंका? जहां[...]

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suresh kumar gaurav

बाल श्रमिक की व्यथा-सुरेश कुमार गौरवबाल श्रमिक की व्यथा-सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 7:52 pm

शिक्षा के मंदिर में जाऊं तो जाऊं कैसे! जैसे सब बच्चे हाजरी लगाते हैं जैसे!! है मजबूरियां मेरी और जिम्मेदारियां[...]

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Meera Singh

जालिम सर्दी-मीरा सिंहजालिम सर्दी-मीरा सिंह

0 Comments 8:09 pm

आयी जब से जालिम सर्दी सबका जीना मुश्किल कर दी। छाया है चहुंओर कुहासा देखो सर्दी की बेदर्दी। सन सन[...]

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Nitu Rani

क्या यही है नव वर्ष का त्योहार- नीतू रानीक्या यही है नव वर्ष का त्योहार- नीतू रानी

0 Comments 8:40 pm

क्या यही है नव वर्ष का त्योहार जिस त्योहार में मारे जाते हैं कई निर्दोष जीवों के परिवार, क्या यही[...]

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S K punam

आनंद का पल है -एस.के.पूनमआनंद का पल है -एस.के.पूनम

0 Comments 9:17 pm

छंद:-मनहरण घनाक्षरी प्रातःकाल की बेला में,खड़ी यमुना किनारे, गागर भरतीं राधा,लेतीं नदी जल है। आरती माधव संग,बोल उठी अंग-अंग, केशव,मोहन[...]

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S K punam

किसान-एस.के.पूनमकिसान-एस.के.पूनम

0 Comments 8:32 pm

रश्मियां निकल आईं,पूरब में लोहित छाईं, कृषक तराने गाएं,अभी प्रातःकाल है। निकला विस्तर छोड़,देखा खेत-खलिहान, किसानों का मुखड़ा भी,देख खुशहाल[...]

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