खिचड़ी खिचड़ी मन में पक रही,बिना किसी आधार। घर में पकती आज तो,बहती है रसधार।। बहती है रसधार,आज का दिन है पावन। लटती मस्त पतंग,गगन में लगे लुभावन।। व्यंजन दिखते…
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अंजाम होता है -रामकिशोर पाठक
अंजाम होता है- गजल १२२२-१२२२-१२२२-१२२२ सदा ही कर्म अच्छे का सुखद अंजाम होता है। किया जिसने यहाँ ऐसा जगत में नाम होता है।। नहीं कोई यहाँ जिसका कभी उसको न…
मिथिला हाट -मनु कुमारी
मिथिला हाट सीता माय के पावन जन्मभूमि , मधुबनी झंझारपुर । ताहि में बनल अछि मिथिला हाट । गेलों घुमय सपरिवार। दुई बजे सब ओतय पहुंचलों । ओतय देखय छी…
प्रभाती पुष्प -जैनेंद्र प्रसाद
प्रभाती पुष्प विविध त्योहार मनहरण घनाक्षरी छंद मानते हैं लोग साथ, लोहड़ी पोंगल बिहू, मकर संक्रांति जैसे, विविध त्योहार हैं। प्रयाग में कल्पवास, पातक का करे नाश, जाने से बदल…
अभी तो मैं बच्ची हूँ
अभी तो मैं बच्ची हूँ पापा इतनी क्या है जल्दी, थोड़ा पढ़-लिख जाने दो। अभी तो नन्हीं कली हूं, फूल तो बन जाने दो। मैं तो हूं छोटी सी गुड़िया,…
एक योगी -डॉ स्नेहलता द्विवेदी
एक योगी एक योगी! मानव को है जगाता, चेतना को है उठाता, विश्व के रण में उतरता, एक योगी। एक योगी! उस शिकागो को बुलाता, भ्रातृ का संदेश देता, विश्व…
बाल विवाह अपराध -एम. एस हुसैन
बाल विवाह अपराध है । पापा मुझको अभी पढ़ने दो जीवन की सीढ़ियां चढ़ने दो अभी न ब्याहो तुम मुझको कुछ और उम्र को बढ़ने दो अभी न बंदिशें लगाओ…
ईश्वर के इंसाफ -जैनेन्द्र प्रसाद
ईश्वर के इंसाफ ले के भारी आफत जाड़ा अइहलै तिल सकरात में, लड़का बड़का में नय अंतर दिखs हय दिन रातमें। रात में रजाई तान सोवे नींद सुखिया, करवट बदल…
प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ बाबा औघड़ दानी धतूरा के फूल गंगा जल पर रीझते हो, तभी तो औघड़ दानी, कहलाते भोलेनाथ। राजा-रंक तुझे प्यारा, तूने सभी को है…
हनुमान -रामकिशोर पाठक
हनुमान- कहमुकरी संग कभी भय नहीं सताता। साहस मुझमें भी उपजाता।। शंका का करता समाधान। क्या सखि? साजन! न सखि! हनुमान।।०१।। सबसे ज्यादा है बलशाली। तन पर डाले फिरता वाली।।…