खिचड़ी -रामपाल प्रसाद

खिचड़ी खिचड़ी मन में पक रही,बिना किसी आधार। घर में पकती आज तो,बहती है रसधार।। बहती है रसधार,आज का दिन है पावन। लटती मस्त पतंग,गगन में लगे लुभावन।। व्यंजन दिखते…

अंजाम होता है -रामकिशोर पाठक

अंजाम होता है- गजल १२२२-१२२२-१२२२-१२२२ सदा ही कर्म अच्छे का सुखद अंजाम होता है। किया जिसने यहाँ ऐसा जगत में नाम होता है।। नहीं कोई यहाँ जिसका कभी उसको न…

प्रभाती पुष्प -जैनेंद्र प्रसाद

प्रभाती पुष्प विविध त्योहार मनहरण घनाक्षरी छंद मानते हैं लोग साथ, लोहड़ी पोंगल बिहू, मकर संक्रांति जैसे, विविध त्योहार हैं। प्रयाग में कल्पवास, पातक का करे नाश, जाने से बदल…

प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ बाबा औघड़ दानी धतूरा के फूल गंगा जल पर रीझते हो, तभी तो औघड़ दानी, कहलाते भोलेनाथ। राजा-रंक तुझे प्यारा, तूने सभी को है…

हनुमान -रामकिशोर पाठक

हनुमान- कहमुकरी संग कभी भय नहीं सताता। साहस मुझमें भी उपजाता।। शंका का करता समाधान। क्या सखि? साजन! न सखि! हनुमान।।०१।। सबसे ज्यादा है बलशाली। तन पर डाले फिरता वाली।।…