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गीत : एक हों हम, हक़ की आवाज़
यूजीसी के फैसलों ने सवाल खड़े किए,
छात्रों–शिक्षकों ने सच के दीप जले किए।
स्वर्ण हो या दलित, पिछड़ा आदिवासी,
हक़ की राह में सबकी एक ही प्यास थी।
किताबें बोलती हैं, चुप नहीं रहतीं,
मेहनत की कीमत यूँ ही घटती नहीं।
न ऊँच, न नीच, न जाति की दीवार,
ज्ञान के मंदिर में सबका अधिकार।
रोज़गार, सम्मान—हमारी पहचान,
संविधान बोले: समान हो इंसान।
हाथ में हाथ, क़दम से क़दम,
टूटें भ्रम, बढ़े एकता का दम।
नफ़रत छोड़ो, संवाद रचो,
न्याय की लौ को और प्रखर करो।
एक स्वर में उठे लोकतंत्र की शान,
यूजीसी सुने—बदले विधान।
जाति नहीं, मानवता बने आधार,
एक होकर लिखें नया इतिहास आज।
कार्तिक कुमार 7004318121
मध्य विद्यालय कटरमाला गोरौल वैशाली

