भक्ति पुष्प फुलवारी महके, हरि आते हर्षाए।
असुर राज बलि के ही द्वारे, हरि वामन बन आए।।
प्रहलाद भक्त पुत्र विरोचन, हरि का ध्यान लगाया।
अश्वमेध सौ यज्ञ किया वह, भक्ति मार्ग अपनाया।।
तीन लोक का बनकर स्वामी, प्रभु की महिमा गाए।
असुर राज बलि के ही द्वारे, हरि वामन बन आए।।०१।।
दानवीरता का यश फैला, न्याय प्रजा को भाया।
मद का जिसमें नाम नहीं था, देव शीश चकराया।।
अदिति गर्भ अवतारी हरि, कश्यप सुत कहलाए।
असुर राज बलि के ही द्वारे, हरि वामन बन आए।।०२।।
याचक बनकर तीन पगों का, माँग रखें हरि प्यारा।
धरा एक पग सुरपुर दूजा, शीश तीसरा वारा।।
बलि के आगे हरि थे हारे, मोक्ष द्वार खुलवाए।
असुर राज बलि के ही द्वारे, हरि वामन बन आए।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
