पद्यपंकज padyapankaj,sandeshparak इस माटी की शान बढ़ाएँ-दिलीप कुमार गुप्ता

इस माटी की शान बढ़ाएँ-दिलीप कुमार गुप्ता



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 इस माटी की शान बढाएँ 

जलाकर स्वदेशी
सुगंधित गुलाल लगाएँ
पतंग उड़ाकर स्वदेशी
स्वाभिमान का तिरंगा फहराएँ
आओ! स्वदेशी अपनाएँ
इस माटी की शान बढाएँ ।

लाखों हाथों को काम मिलेगा
घर परिवार खुशहाल होगा
कोई न होगा भूखा प्यासा
सबकी पूरी होगी अभिलाषा
आओ! स्वदेशी अपनाएँ
इस माटी की शान बढाएँ ।

स्वदेशी हो जीवन शैली
तभी भरेगी वतन की थैली
वक्त की आज यही पुकार
खुशियाँ लौटेंगी अपने द्वार
आओ! स्वदेशी अपनाएँ
इस माटी की शान बढाएँ ।

संस्कृति अपनी, अपना संस्कार
स्वदेशी हो अपना संसार
स्वदेश प्रेम मे देख सराबोर
भागी थी फिरंगी सरकार
आओ! स्वदेशी अपनाएँँ
इस माटी की शान बढाएँ ।

विदेशी उत्पादों से पटा बाजार
बहुराष्ट्रीय कंपनी की भरमार
आओ! करे पुनर्विचार
हो बापू के स्वप्न साकार
आओ! स्वदेशी अपनाएँ
इस माटी की शान बढाएँ ।

दिलीप कुमार गुप्ता
प्रधानाध्यापक म.वि. कुआड़ी
अररिया, बिहार

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