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सुरभित सत्ता को अपनाएँ, मान इसे चित अंत्र।
जय बोलो भारत माता की, आया शुभ गणतंत्र।।
संविधान है अपना प्यारा, बना बहुत विस्तार।
नियम सभी है इसमें वर्णित, शासन का सब सार।।
छब्बीस जनवरी को ही यह, बना देश का मंत्र।
जय बोलो भारत माता की, आया शुभ गणतंत्र।।०१।।
चलता जिससे देश हमारा, रखकर जग में शान।
सबसे विशाल यह दुनिया का, गर्वित हिंदुस्तान।।
जन-गण-मन सबका यह रक्षक, आज बना है जंत्र।
जय बोलो भारत माता की, आया शुभ गणतंत्र।।०२।।
ऋतु वसंत है हर्षित करता, नभ में उड़े पतंग।
प्रेम भरे मुस्कान होंठ पर, सबमें दिखे उमंग।।
समृद्ध अपना देश हुआ है, विकसित करके यंत्र।
जय बोलो भारत माता की, आया शुभ गणतंत्र।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला
बिहटा, पटना, बिहार
संपर्क – 9835232978

