जहाँ जीत है मिलता हमको, उत्सव में हम-सब खोते।
कभी हार जब गले लगाती, नजर झुकाए हम रोते।।
हार-जीत दोनों ही हमको, सीख सदा सबको देती।
जीवन का बन अंग हमेशा, बांँहों में है भर लेती।।
मगर फसल वह ही हम काटे, जो बीज खेत में बोते।
जहाँ जीत है मिलता हमको, उत्सव में हम-सब खोते।।०१।।
श्रम से साधित होता सबकुछ, धीरज रखकर चलना है।
लक्ष्य भेदना कठिन नहीं है, हिम्मत के बल पलना है।।
क्या पाएगा वह बतलाओ, भाग्य भरोसे जो सोते।
जहाँ जीत है मिलता हमको, उत्सव में हम-सब खोते।।०२।।
खेल भावना से हम खेले, रण कौशल मन में धारे।
शौर्य हमारा सदा जगत् में, चमक उठे बनकर तारे।।
पौरुष का जो धर्म निभाते, बोलो विचलित कब होते।
जहाँ जीत है मिलता हमको, उत्सव में हम-सब खोते।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला
बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
