कुछ तो सोच समझ ले प्राणी – राम किशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

कुछ तो सोच समझ ले प्राणी।

निकले जब भी मुख से वाणी।।

निज पर इतना अभिमान न कर।

अपना इतना गुणगान न कर।।

पूर्ण धरा पर कौन यहाँ है।

भ्रम में पड़कर मौन यहाँ है।।

है इतना ही संसार नहीं।

क्या और कहीं विस्तार नहीं।।

अंतस में अपने देखो तुम।

तुमने ही सत्य किया है गुम।।

सरिता सी निर्मल बहने दो।

सत्य सनातन को रहने दो।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक

प्रधान शिक्षक

प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला

बिहटा, पटना, बिहार।

संपर्क – 9835232978

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